डूंगरपुर में पहली बार निकला RSS का त्रिवेणी पथ संचलन, तीन दिशाओं से निकले स्वयंसेवकों का तहसील चौराहे पर संगम
Monday, Oct 26, 2026-01:16 PM (IST)
डूंगरपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 101वें वर्ष के अवसर पर राजस्थान के डूंगरपुर शहर में विजयादशमी उत्सव के तहत पहली बार त्रिवेणी पथ संचलन का आयोजन किया गया। रविवार शाम आयोजित इस कार्यक्रम में तीन अलग-अलग दिशाओं से निकले पथ संचलनों का तहसील चौराहे पर संगम हुआ। सैकड़ों स्वयंसेवकों ने अनुशासित कदमताल के साथ शहर के प्रमुख मार्गों से संचलन किया। इस दौरान जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया गया।
तीन अलग-अलग स्थानों से शुरू हुआ पथ संचलन
संघ की ओर से आयोजित त्रिवेणी पथ संचलन की शुरुआत तीन अलग-अलग स्थानों से हुई। पहली धारा सम्पत मार्ग स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर, दूसरी नवाडेरा और तीसरी नवा महादेव मंदिर से रवाना हुई। तीनों धाराएं निर्धारित मार्गों से होते हुए तहसील चौराहे पर पहुंचीं, जहां उनका संगम हुआ। इसके बाद सभी स्वयंसेवक संयुक्त रूप से आगे बढ़े।
करीब दो किलोमीटर लंबे संचलन में स्वयंसेवकों की कदमताल, बैंड की धुन और घोष दल की लयबद्ध प्रस्तुतियां आकर्षण का केंद्र रहीं। आयोजन के दौरान शहर में उत्सवी माहौल देखने को मिला।
प्रमुख मार्गों से गुजरा संचलन, जगह-जगह हुई पुष्पवर्षा
त्रिवेणी पथ संचलन गेपसागर की पाल, पुराना अस्पताल, माणक चौक, घाटी जैन मंदिर, हड़मतपोल, वखारिया चौक, कानेरा पोल और मोची बाजार सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। इसके बाद संचलन नगर परिषद के सामने से होते हुए लक्ष्मण मैदान पहुंचा।
मार्ग में विभिन्न स्थानों पर शहरवासियों और सर्व समाज के लोगों ने पुष्पवर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। संगम स्थल पर भी लोगों की ओर से अभिनंदन किया गया, जबकि संतों ने स्वयंसेवकों को आशीर्वाद प्रदान किया।
लक्ष्मण मैदान में हुआ समापन कार्यक्रम
पथ संचलन का समापन लक्ष्मण मैदान में आयोजित कार्यक्रम के साथ हुआ। यहां पूर्व नायब सूबेदार ललित मोहन, चित्तौड़ प्रांत के शारीरिक प्रमुख भारत भूषण और जिला सरसंघचालक वाईके शर्मा मंचासीन रहे।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने संघ की विचारधारा, सामाजिक समरसता, राष्ट्र के प्रति नागरिकों के कर्तव्यों और सांस्कृतिक चेतना जैसे विषयों पर विचार रखे।
सामाजिक समरसता और प्रकृति संरक्षण पर दिया जोर
वक्ताओं ने कहा कि संघ अपने शताब्दी वर्ष के बाद तीन प्रमुख संकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है। इनमें समाज में स्वजागरण की भावना विकसित करना, जाति-धर्म और ऊंच-नीच के आधार पर होने वाले भेदभाव को समाप्त कर सामाजिक समरसता बढ़ाना तथा प्रकृति का संरक्षण करना शामिल है।
उन्होंने समाज में प्रत्येक व्यक्ति के प्रति अपनत्व और परिवार भाव विकसित करने की आवश्यकता बताई। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों के उपयोग को कम करने पर भी जोर दिया।
धर्म और समाज की रक्षा में शास्त्र एवं शस्त्र के महत्व पर चर्चा
कार्यक्रम में वक्ताओं ने धर्म और संस्कृति की रक्षा के संदर्भ में शास्त्र एवं शस्त्र दोनों के महत्व पर विचार रखे। उनके अनुसार, शास्त्र व्यक्ति को ज्ञान और सही दिशा प्रदान करते हैं, जबकि शस्त्र को धर्म एवं समाज की रक्षा से जोड़कर देखा जाता है।
डूंगरपुर में आयोजित इस त्रिवेणी पथ संचलन के माध्यम से अनुशासन, सामाजिक एकता, सांस्कृतिक चेतना और मातृभूमि के प्रति समर्पण का संदेश दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्वयंसेवक उपस्थित रहे।
