डूंगरपुर में मिड-डे मील टेंडर पर विवाद, फर्जी दस्तावेज लगाने के आरोप; जांच की मांग
Friday, Mar 13, 2026-03:38 PM (IST)
डूंगरपुर जिले में मिड-डे मील योजना के तहत परिवहन और आपूर्ति के टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय फर्मों ने टेंडर प्रक्रिया में फर्जी दस्तावेज लगाने और सरकारी नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए जिला कलेक्टर से शिकायत की है। शिकायतकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने और टेंडर प्रक्रिया को निरस्त कर नए सिरे से टेंडर जारी करने की मांग की है।
फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र लगाने का आरोप
श्रीगणेश ट्रेडिंग कंपनी के प्रोपराइटर मुकेश ने गजानन ट्रांसपोर्ट एंड एंटरप्राइजेज पर टेंडर प्रक्रिया में फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया है। शिकायत में कहा गया है कि इस फर्म ने टेंडर में भाग लेने के लिए क्रय-विक्रय सहकारी समिति के नाम से अनुभव प्रमाण-पत्र लगाया है, जिसे पूरी तरह फर्जी और कूटरचित बताया गया है।
शिकायतकर्ता का दावा है कि यह दस्तावेज सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता। आरोप है कि केवीएसएस ने संबंधित फर्म को कोई कार्यादेश नहीं दिया था, इसके बावजूद उसे 5 वर्ष के परिवहन अनुभव का प्रमाण-पत्र जारी कर दिया गया।
केवीएसएस की योग्यता पर भी उठे सवाल
इस मामले में एक अन्य शिकायत भागचंद नाथुजी कलाल की ओर से भी की गई है। उन्होंने सीधे तौर पर केवीएसएस डूंगरपुर की पात्रता पर सवाल उठाए हैं।
शिकायत में कहा गया है कि रसद विभाग के ऑडिट के दौरान डूंगरपुर के दोवड़ा और बिछीवाड़ा ब्लॉक में केवीएसएस के खिलाफ रिकवरी निकाली गई थी। नियमों के अनुसार यदि किसी संस्था पर सरकारी राशि बकाया हो या एनओसी नहीं हो, तो वह टेंडर प्रक्रिया में अपात्र मानी जाती है। इसके बावजूद केवीएसएस को तकनीकी बोली में सफल घोषित कर दिया गया।
जांच और कार्रवाई की मांग
दोनों शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन से उच्च स्तरीय जांच समिति गठित कर पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। साथ ही संदिग्ध अनुभव प्रमाण-पत्रों का संबंधित संस्थाओं से सत्यापन कराने, दोषी पाए जाने पर संबंधित फर्मों को अयोग्य घोषित कर ब्लैकलिस्ट करने और आवश्यक होने पर पुलिस कार्रवाई करने की भी मांग की है।
