नागौर में ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया हुई हाईटेक, अब सेंसर और एआई से होगा पास-फेल का फैसला
Tuesday, Mar 24, 2026-03:24 PM (IST)
नागौर: नागौर जिले में अब ड्राइविंग लाइसेंस प्राप्त करने के लिए पूरी प्रक्रिया हाईटेक हो गई है। आरटीओ ने नई व्यवस्था लागू की है, जिसमें इंसान की बजाय सेंसर और एआई-आधारित ट्रैक पर ट्रायल दिया जाएगा। इस नई प्रणाली से ड्राइविंग टेस्ट अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष हो जाएगा। अब सेंसर और कैमरे ड्राइविंग कौशल को रियल-टाइम में रिकॉर्ड करेंगे, और यदि आवेदक गलत तरीके से गाड़ी चलाता है तो उसे तुरंत फेल कर दिया जाएगा।
इस प्रक्रिया में सबसे पहले आवेदक का फेस स्कैन किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि ट्रायल के दौरान कोई दूसरा व्यक्ति गाड़ी नहीं चला रहा है। इसके बाद, ट्रैक पर लगे 25 कैमरे पूरी गतिविधि को रिकॉर्ड करेंगे। बाइक के ट्रैक पर आवेदक को 90 सेकंड और कार के ट्रैक पर 120 सेकंड का समय दिया जाएगा। ट्रैक पर गाड़ी चलाने के दौरान रिवर्स पार्किंग, ब्रेक लगाना, यू-टर्न, और अन्य महत्वपूर्ण ड्राइविंग कौशल की जांच की जाएगी। यदि वाहन निर्धारित मानकों का पालन नहीं करता, तो सिस्टम स्वतः उसे फेल कर देगा।
इस तकनीकी सुधार का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है। पहले देखा जाता था कि कुछ लोग बिना पर्याप्त ड्राइविंग कौशल के लाइसेंस प्राप्त कर लेते थे, जिससे सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ जाती थी। अब, इस नई प्रणाली के माध्यम से केवल सक्षम और प्रशिक्षित चालकों को ही लाइसेंस मिलेगा, जिससे सड़क पर अनुशासन और सुरक्षा में सुधार होगा।
परिवहन विभाग के अनुसार, इस नए सिस्टम से मानवीय हस्तक्षेप कम होगा, जिससे भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावनाएं भी समाप्त हो जाएंगी। ट्रायल के दौरान पूरी प्रक्रिया रियल-टाइम में मॉनिटर की जाएगी और सिस्टम से परिणाम स्वतः जनरेट होंगे, जिससे किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या अनियमितता की संभावना समाप्त हो जाएगी।
इस ऑटोमैटिक ट्रैक को अब अंतिम चरण में हाईटेक सिस्टम से जोड़ा जा रहा है और जल्द ही यह पूरी तरह से चालू हो जाएगा। इससे ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता में बढ़ोतरी होगी।
