चूरू में 3 नगर वन परियोजना अटकी: बजट की कमी से काम धीमा, अब 2027 तक पूरा होने की उम्मीद
Tuesday, Mar 31, 2026-05:56 PM (IST)
राजस्थान के चूरू जिले में शहरी हरियाली बढ़ाने के लिए शुरू की गई नगर वन योजना फिलहाल बजट की कमी के चलते अधर में लटकी हुई है। करीब 5.60 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना में से अभी तक पूरा फंड जारी नहीं हुआ, जिससे काम तय समयसीमा में पूरा नहीं हो सका।
तीन प्रमुख स्थानों पर बनने हैं नगर वन
इस योजना के तहत शहर के तारानगर रोड, चूरू-सरदारशहर रोड और डाबला रोड पर तीन नगर वन विकसित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर में हरित क्षेत्र बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती देना है।
बजट का 60% ही मिला, बाकी राशि लंबित
केंद्र सरकार की नगर वन योजना के तहत अब तक लगभग 4 करोड़ रुपए (करीब 60%) ही जारी किए गए हैं। शेष 1.60 करोड़ रुपए अभी तक नहीं मिल पाए हैं, जिसके कारण कई जरूरी कार्य अधूरे पड़े हैं। मूल रूप से यह काम दिसंबर 2025 तक पूरा होना था, लेकिन अब इसके 2027 तक पूरा होने की संभावना जताई जा रही है।
अधूरे पड़े हैं कई जरूरी काम
फंड की कमी के चलते पौधों की देखभाल, मेंटेनेंस, लाइटिंग और पार्क विकास जैसे काम प्रभावित हो रहे हैं। गर्मी के मौसम में पौधों की सही देखभाल नहीं हो पाने से वे सूखने की कगार पर हैं।
हालांकि, तीनों नगर वनों में चारदीवारी, सोलर पैनल, बोरवेल, तारबंदी, मुख्य द्वार और वॉकिंग ट्रैक जैसे कुछ प्रारंभिक कार्य पूरे किए जा चुके हैं। इसके अलावा पौधरोपण भी किया गया है, लेकिन आगे के विकास कार्य अभी रुके हुए हैं।
बजट मिलते ही काम होगा तेज
अधिकारियों के अनुसार, केंद्र सरकार की ओर से बजट जारी किया जा चुका है और राज्य स्तर पर अप्रैल के मध्य तक राशि मिलने की उम्मीद है। फंड मिलते ही शेष कार्यों के टेंडर जारी कर काम को गति दी जाएगी।
क्या-क्या काम हैं बाकी
तीनों नगर वनों में पाइपलाइन से सिंचाई व्यवस्था, शौचालय निर्माण, गार्ड चौकी, गार्डन डेवलपमेंट, सोलर लाइटिंग, बच्चों के लिए प्ले एरिया, अतिरिक्त पौधरोपण और मिट्टी संरक्षण से जुड़े कार्य अभी पूरे किए जाने हैं। इसके अलावा प्रत्येक स्थल पर कुएं के निर्माण का भी प्रस्ताव है।
योजना का उद्देश्य
यह योजना पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा शुरू की गई है, जिसका लक्ष्य 2027 तक देशभर में 1000 नगर वन और 400 नगर वाटिका विकसित करना है, ताकि शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाई जा सके और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिले।
