बांसवाड़ा–सलूम्बर स्टेट हाईवे-32 पर 744 करोड़ की घोषणा, लेकिन DPR सर्वे अधूरा
Friday, Feb 13, 2026-06:41 PM (IST)
बांसवाड़ा। बजट में प्रस्तावित स्टेट हाईवे-32 के बांसवाड़ा–सलूम्बर मार्ग के 93 किलोमीटर हिस्से को सुगम बनाने के लिए राज्य सरकार ने 744 करोड़ रुपए खर्च करने की घोषणा की है। हालांकि जमीनी स्थिति यह है कि इस सड़क की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए चल रहा सर्वे अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।
ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि सड़क को 10 मीटर चौड़ा किया जाएगा या 12 मीटर, और आबादी वाले कस्बों के लिए बाइपास बनाया जाएगा या मार्ग पूर्ववत आबादी के बीच से ही निकलेगा।
अगस्त 2025 से चल रहा है DPR सर्वे
बांसवाड़ा–सलूम्बर रोड की DPR का कार्य अगस्त 2025 में 66 लाख रुपए की लागत से शुरू हुआ था। यह सर्वे एक वर्ष में पूरा होना है, यानी अगस्त 2026 तक रिपोर्ट सरकार को सौंपी जानी है।
DPR के तहत ट्रैफिक सर्वे, अलाइनमेंट रिपोर्ट, तथा कस्बों में भूमि की उपलब्धता का अध्ययन किया जा रहा है। फिलहाल सर्वे कार्य केवल 15 से 20 प्रतिशत तक ही पूरा हुआ है।
10 से 12 मीटर चौड़ाई की संभावना
वर्तमान में बांसवाड़ा से सलूम्बर तक सड़क की चौड़ाई लगभग 7 मीटर है, जबकि सलूम्बर से आगे उदयपुर तक मार्ग करीब 10 मीटर चौड़ा है।
ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि DPR के बाद इस हिस्से को भी 10 से 12 मीटर तक चौड़ा किया जा सकता है। हालांकि अंतिम निर्णय रिपोर्ट पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।
इन कस्बों से गुजरता है हाईवे
स्टेट हाईवे-32 बांसवाड़ा से सलूम्बर के बीच चिड़ियावासा, गनोड़ा, लोहारिया, पालोदा, साबला और आसपुर जैसे कस्बों के बीच से गुजरता है।
आबादी क्षेत्रों से होकर गुजरने के कारण यातायात प्रभावित रहता है और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। यदि बाइपास की योजना लागू होती है, तो इन कस्बों को राहत मिल सकती है।
भोपाल की कंपनी कर रही है सर्वे
सड़क चौड़ाईकरण के लिए एलएन मालवीया प्राइवेट लिमिटेड कंपनी (भोपाल) सर्वे कार्य कर रही है। ट्रैफिक स्टडी का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि वनभूमि और खातेदारी भूमि का आकलन जारी है।
जहां सड़क चौड़ी करना संभव नहीं है, वहां बाइपास के विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
अगस्त 2026 के बाद होगी तस्वीर साफ
फिलहाल DPR तैयार करने का कार्य जारी है। अगस्त 2026 में सर्वे पूरा होने के बाद ही सड़क की अंतिम चौड़ाई, अलाइनमेंट और बाइपास को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बजट में बड़ी घोषणा के बावजूद जमीनी प्रगति धीमी होने से स्थानीय लोगों में सवाल उठने लगे हैं कि 744 करोड़ की इस परियोजना को मूर्त रूप कब मिलेगा।
