ढ़ाई साल बाद प्रदेश बीजेपी में संगठन महामंत्री नियुक्त, ख़ास काम के लिए भेजे गए हैं अजेय कुमार
Monday, Jun 01, 2026-05:06 PM (IST)
जयपुर। राजस्थान बीजेपी में ढ़ाई साल में सबसे बड़ी ख़बर आज आई हैं. जी हां, क़रीब ढ़ाई साल से राजस्थान में प्रदेश संगठन महामंत्री का पद खाली पड़ा था, पिछले संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर को तेलंगाना भेजा गया था, तब से ये अति महत्वपूर्ण पद खाली पड़ा था. एक जून को इस पद अजेय कुमार की नियुक्ति कर दी गई. इस ओहदे को अति महत्वपूर्ण क्यों कह रहे हैं, इसके बारे में बात करें, इससे पहले जान लीजिए कौन हैं अजेय कुमार...।
अजेय कुमार ने 1997 में उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। प्रारंभिक चरण में श्रीनगर, हरिद्वार एवं हल्द्वानी में नगर प्रचारक तथा ऊधमसिंह नगर में जिला प्रचारक के रूप में कार्य करते हुए आपने संगठन को जमीनी स्तर पर सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद, अल्मोड़ा विभाग के विभाग प्रचारक के रूप में दायित्व निभाया। साल, 2009 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद एवं बिजनौर विभाग के विभाग प्रचारक के रूप में संगठन विस्तार एवं कार्यकर्ताओं के मार्गदर्शन का काम किया साथ ही, मेरठ प्रांत में प्रांत बौद्धिक शिक्षण प्रमुख के रूप में काम किया.
साल 2018 में अजेय कुमार को भारतीय जनता पार्टी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय महामंत्री (संगठन) का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया. साल, 2019 से वर्तमान तक आप भारतीय जनता पार्टी, उत्तराखंड के प्रदेश महामंत्री (संगठन) के रूप में कार्यकर्ताओं का सतत मार्गदर्शन करते हुए संगठन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। मौजूदा दौर में, उत्तराखंड भाजपा के शिल्पकार अजेय कुमार को मिली राजस्थान की कमान मिली है.
भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उत्तराखंड में संगठनात्मक मजबूती, अनुशासन और रिजल्ट को देखते हुए राजस्थान जैसे राजनीतिक लिहाज से अति महत्वपूर्ण राज्य में संगठन की जिम्मेदारी दी है. अजेय कुमार को करीब से जानने वाले लोगों की राय है कि अजेय कुमार के नेतृत्व में उत्तराखंड भाजपा के संगठन को नए रूप में रचा है. उनके कार्यकाल में संगठन ने न केवल विस्तार किया, बल्कि मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष जैसे शीर्ष पदों पर बदलाव के बावजूद संगठन की कार्यप्रणाली और सक्रियता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा। बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक मजबूत संवाद व्यवस्था, दूरस्थ क्षेत्रों में नियमित प्रवास, कार्यकर्ता प्रशिक्षण, सदस्यता अभियान और राष्ट्रीय कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन ने उत्तराखंड को संगठनात्मक दृष्टि से एक आदर्श मॉडल के रूप में स्थापित किया। यही मॉडल अब राजस्थान में अपनाया जाएगा. अजेय कुमार के कार्यकाल की एक प्रमुख विशेषता यह रही कि उन्होंने संगठन को केवल चुनावी गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे सतत सक्रिय, अनुशासित और जनसरोकारों से जोडने के लिए जाना जाता है.
राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राजस्थान में उन्हें संगठन की कमान सौंपकर भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिया है कि संगठन को नई ऊर्जा देने और चुनावी दृष्टि से सशक्त बनाने के लिए अनुभवी एवं परिणाम देने वाले नेतृत्व पर ही भरोसा किया जाएगा. राजनीतिक हलकों में इस निर्णय को अजेय कुमार की संगठनात्मक क्षमता पर राष्ट्रीय नेतृत्व की मजबूत मुहर के रूप में देखा जा रहा है। राजस्थान में राज्यसभा चुनाव, अगामी दिनों में होने वाले पंचायत और निकाय चुनावों के लेकर संगठन और सत्ता में तालमेल की वृहद कड़ी की ज़रूरत महसूस हो रही थी. इस लिहाज़ से अजेय कुमार की नियुक्ति को देखा जा रहा है.
संगठन के विस्तार और कार्यकर्ता और सत्ता के बीच समन्वयक बनते हुए राजस्थान में अजेय कुमार को केन्द्रीय नेतृत्व ने बीजेपी को अजेय बनाने की जिम्मेदारी सौंप दी है...इस नियुक्ति के बाद प्रदेश बीजेपी में आमूलचूल बदलाव तय है. जाहिर है इसमें सरकार भी शामिल है.
