प्रदेश भाजपा में ढ़ाई साल बाद संगठन महामंत्री अजेय कुमार आए, राजस्थान में बीजेपी को ‘अजेय’ बनाने हुई नियुक्ति
Monday, Jun 01, 2026-06:17 PM (IST)
प्रदेश भाजपा में ढ़ाई साल बाद संगठन महामंत्री अजेय कुमार आए
राजस्थान में बीजेपी को ‘अजेय’ बनाने हुई नियुक्ति
सत्ता-संगठन में आमूलचूल बदलाव होना तय
उत्तराखंड मॉडल पर होगा संगठन में काम
-विशाल सूर्यकांत
जयपुर। राजस्थान बीजेपी में ढ़ाई साल में सबसे बड़ी ख़बर आज आई हैं. क़रीब ढ़ाई साल से राजस्थान में प्रदेश संगठन महामंत्री का पद खाली पड़ा था, पिछले संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर को तेलंगाना भेजा गया था, तब से ये अति महत्वपूर्ण पद खाली पड़ा था. एक जून को इस पद अजेय कुमार की नियुक्ति कर दी गई. क्यों ये पद इतना महत्वपूर्ण बताया जा रहा है. इस पर आगे बात करेंगे लेकिन इससे पहले जानिए अजेय कुमार के सार्वजनिक जीवन का अब तक का सफ़र कैसा रहा है.

संघ के प्रचारक के रूप में सार्वजनिक जीवन की शुरुआत
अजेय कुमार ने 1997 में उत्तराखंड के श्रीनगर गढ़वाल से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत की। प्रारंभिक चरण में श्रीनगर, हरिद्वार एवं हल्द्वानी में नगर प्रचारक तथा ऊधमसिंह नगर में जिला प्रचारक के रूप में काम किया. इसके बाद, अल्मोड़ा विभाग के विभाग प्रचारक के रूप में दायित्व निभाया। साल, 2009 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुरादाबाद एवं बिजनौर विभाग के विभाग प्रचारक के रूप में संगठन विस्तार एवं कार्यकर्ताओं के बीच काम किया.
अजेय कुमार को मिली राजस्थान की कमान मिली
अजेय कुमार मेरठ प्रांत में प्रांत बौद्धिक शिक्षण प्रमुख के रूप में काम किया. साल 2018 में अजेय कुमार को भारतीय जनता पार्टी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में क्षेत्रीय महामंत्री, संगठन का महत्वपूर्ण दायित्व सौंपा गया. साल, 2019 से वर्तमान तक आप भारतीय जनता पार्टी, उत्तराखंड के प्रदेश महामंत्री,संगठन के रूप में कार्यकर्ताओं के साथ काम किया.
मौजूदा दौर में, उत्तराखंड भाजपा के शिल्पकार अजेय कुमार को मिली राजस्थान की कमान मिली है. भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने उत्तराखंड में संगठनात्मक मजबूती, अनुशासन और रिजल्ट को देखते हुए राजस्थान जैसे राजनीतिक लिहाज से अति महत्वपूर्ण राज्य में संगठन की जिम्मेदारी दी है. अजेय कुमार को करीब से जानने वाले लोगों की राय है कि अजेय कुमार के नेतृत्व में उत्तराखंड भाजपा के संगठन को नए रूप में रचा है.

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री, अध्यक्ष बदले लेकिन संगठन रहा मजबूत
अजेय कुमार के उत्तराखंड कार्यकाल में संगठन ने न केवल विस्तार किया, बल्कि मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष जैसे शीर्ष पदों पर बदलाव के बावजूद संगठन की कार्यप्रणाली और सक्रियता बनी रही. बूथ स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक मजबूत कम्यूनिकेशन, रिमोट एरिया तक में नियमित प्रवास, कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग और व्यापक सदस्यता अभियान से वो संगठन की नब्ज़ को टटोलते रहते हैं.
संगठन का उत्तराखंड आदर्श मॉडल,राजस्थान में भी होगा लागू
अजेय कुमार की नियुक्ति से राजस्थान में संगठन में बड़ा बदलाव होना तय है. राजस्थान में एक बार बदलती सरकार के बीच अजेय कुमार के कार्यकाल की एक प्रमुख विशेषता यह रही कि उन्होंने संगठन को केवल चुनावी गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे सतत सक्रिय, अनुशासित और जनसरोकारों से जोडने के लिए जाना जाता है. सूत्रों के मुताबिक राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राजस्थान में उन्हें संगठन की कमान सौंपकर भाजपा नेतृत्व ने स्पष्ट संकेत दिया है कि संगठन को नई ऊर्जा देने और चुनावी दृष्टि से सशक्त बनाने के लिए अनुभवी एवं परिणाम देने वाले नेतृत्व पर ही भरोसा किया जाएगा. राजनीतिक हलकों में इस निर्णय को अजेय कुमार की संगठनात्मक क्षमता पर राष्ट्रीय नेतृत्व की मजबूत मुहर के रूप में देखा जा रहा है। राजस्थान में राज्यसभा चुनाव, अगामी दिनों में होने वाले पंचायत और निकाय चुनावों के लेकर संगठन और सत्ता में तालमेल की वृहद कड़ी की ज़रूरत महसूस हो रही थी. इस लिहाज़ से अजेय कुमार की नियुक्ति को देखा जा रहा है. संगठन के विस्तार और कार्यकर्ता और सत्ता के बीच समन्वयक बनते हुए राजस्थान में अजेय कुमार को केन्द्रीय नेतृत्व ने बीजेपी को अजेय बनाने की जिम्मेदारी सौंप दी है...इस नियुक्ति के बाद प्रदेश बीजेपी में आमूलचूल बदलाव तय है. जाहिर है इसमें सरकार भी शामिल है.

कैसे होती है भाजपा में प्रदेश संगठन महामंत्री की नियुक्ति
बीजेपी में प्रदेश संगठन महामंत्री का पद संगठन के लिहाज से बहुत शक्तिशाली पद है. पर्दे के पीछे रहकर चाणक्य जैसी भूमिका संगठन महामंत्री के लिए बनाई गई है. जिसमें प्रदेश संगठन महामंत्री का मुख्य काम पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करना होता है। सार्वजनिक रूप से ज्यादा सामने न आकर पूरी तरह संगठन की मजबूती के लिए काम करना होता है, जिसमें चुनावों में बूथ मैनेजमेंट लेकर कार्यकर्ताओं की ट्रेनिंग और एक्टिव रखने की जिम्मेदारी होती है. संगठन महामंत्री का ये पद दरअसल, बीजेपी और आरएसएस के बीच एक पुल का काम करता है. पार्टी की विचारधारा और कार्यक्रमों की निगरानी और फीडबैक देने के काम इसी के जिम्मे होता है. इनकी नियुक्ति में सीधे केन्द्रीय नेतृत्व का हस्तक्षेप होता है. यानि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, केन्द्रीय नेतृत्व की मंजूरी के बिना किसी को संगठन महामंत्री नियुक्त नहीं कर सकते.
