करौली में प्राइवेट बसों का चक्काजाम, अनिश्चितकालीन हड़ताल से यात्रियों की बढ़ी परेशानी
Wednesday, Feb 25, 2026-02:06 PM (IST)
करौली: करौली जिले में निजी बस ऑपरेटरों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। इस ‘चक्काजाम’ के चलते जिला मुख्यालय सहित ग्रामीण रूटों पर निजी बसों का संचालन पूरी तरह ठप हो गया है। इससे रोजाना यात्रा करने वाले यात्रियों, छात्रों और कामकाजी लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
बस संचालकों का कहना है कि करौली से मंडरायल, मासलपुर और केला देवी मंदिर जैसे प्रमुख मार्गों पर टेम्पो चालकों का दबदबा बढ़ गया है। इसके कारण बस ऑपरेटरों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और नियमित संचालन प्रभावित हो रहा है।
हड़ताल का एक प्रमुख कारण वाहनों की फिटनेस जांच सुविधा का स्थानीय स्तर पर उपलब्ध न होना भी है। ऑपरेटरों के अनुसार, फिटनेस अवधि समाप्त होने पर बसों को जयपुर, सवाई माधोपुर या दौसा ले जाना पड़ता है। इस दौरान टोल प्लाजा से गुजरते समय 5,000 से 10,000 रुपये तक का स्वचालित चालान कट जाता है। बस संचालकों की मांग है कि करौली में ही फिटनेस जांच की सुविधा शुरू की जाए, ताकि उन्हें अनावश्यक आर्थिक बोझ न उठाना पड़े।
बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन से जुड़े मुकेश शर्मा उर्फ मुक्ति पांडे का कहना है कि शासन द्वारा फिटनेस शुल्क और टैक्स में की गई वृद्धि से निजी बस ऑपरेटरों की आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई है। उन्होंने प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए कहा कि निजी बसों में खड़ी सवारियों को लेकर चालान किए जाते हैं, जबकि सरकारी बसों पर सख्ती नहीं की जाती।
इसके अलावा बसों से कैरियर (जाल) हटवाने के निर्णय का भी विरोध किया जा रहा है। ऑपरेटरों का कहना है कि इससे मजदूरी के लिए बाहर से आने-जाने वाले यात्रियों को सामान रखने में दिक्कत हो रही है।
बस संचालकों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता और करौली में फिटनेस जांच की सुविधा शुरू नहीं होती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। वहीं, यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे उनका समय और खर्च दोनों बढ़ रहे हैं।
