करौली: कूनो से मण्डरायल डांग पहुंचा चीता KGP3, वन विभाग अलर्ट
Friday, May 08, 2026-03:49 PM (IST)
करौली: करौली के मण्डरायल डांग इलाके में कूनो अभयारण्य से निकलकर एक चीता KGP3 पहुंच गया है। इसकी सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम अलर्ट मोड में आ गई और क्षेत्र में निगरानी तेज कर दी गई। सहायक वन संरक्षक हरी सिंह हाड़ा के निर्देशन में रेंजर टिंकू सिंह और रेंजर इन्द्रजीत सिंह की टीम ने मनोखुर चंदेलीपुरा के वन क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया।
जानकारी के अनुसार, चीता KGP3 मध्य प्रदेश के कूनो अभयारण्य से ओण के रास्ते होते हुए राजस्थान के डांग इलाके में प्रवेश किया। वन विभाग की टीम ने रातभर चीते पर नजर रखी और उसके मूवमेंट को ट्रैक करने का काम जारी रखा। इस संबंध में कूनो अभयारण्य के अधिकारियों को भी पूरी जानकारी दी गई है।
वन विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों से सतर्क रहने का आग्रह किया है। ग्रामीणों को चेताया गया है कि किसी भी अप्रत्याशित चीता की मौजूदगी पर तुरंत वन विभाग को सूचित करें। विभाग ने यह भी कहा कि चीता आमतौर पर मानव से दूरी बनाए रखता है, लेकिन सावधानी बरतना आवश्यक है।
वन अधिकारियों का कहना है कि KGP3 का यह मार्ग सामान्य माना जा सकता है, क्योंकि पुनःस्थापित चीतों की स्वतंत्र घुमंतू प्रवृत्ति होती है। ऐसे में वन विभाग का उद्देश्य न सिर्फ चीते की सुरक्षा करना है, बल्कि स्थानीय लोगों और गांवों को भी सुरक्षित रखना है।
कूनो अभयारण्य में वर्ष 2022 में चीतों का पुनर्वास किया गया था। वन विभाग अब तक इन चीतों की निगरानी के लिए रेडियो कॉलर और GPS ट्रैकिंग का प्रयोग कर रहा है। अधिकारियों का मानना है कि KGP3 की गतिविधियों पर नजर रखना आवश्यक है ताकि उसे सुरक्षित और संरक्षित वातावरण में रखा जा सके।
वन विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि ग्रामीणों को डराने-धमकाने वाले किसी भी अफवाह या सोशल मीडिया पोस्ट पर ध्यान न दें। अधिकारियों का कहना है कि जंगल और आसपास के इलाके में संयमित और सतर्क व्यवहार ही सुरक्षा की कुंजी है।
इस तरह, कूनो से करौली तक KGP3 की यात्रा वन विभाग के लिए एक चुनौतीपूर्ण परंतु महत्वपूर्ण निगरानी मिशन बन गई है।
