झुंझुनूं में मौसम का ‘यू-टर्न’: मावठ की फुहारों से ठिठुरा जिला, पिलानी-चिड़ावा में ओले; ओलावृष्टि का येलो अलर्ट!

Wednesday, Feb 18, 2026-04:30 PM (IST)

राजस्थान के शेखावाटी अंचल में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। झुंझुनूं जिले में बुधवार को सुबह से ही बादलों का डेरा रहा और रुक-रुक कर बारिश होती रही। इससे पहले मंगलवार देर रात भी बादलों की गर्जना के साथ हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई थी। ठंडी हवाओं और शीतलहर के असर से तापमान में गिरावट आई है, जिससे लोगों को फरवरी में ही सर्दी का अहसास होने लगा।

पिलानी और चिड़ावा में ओलावृष्टि, बैर के आकार के गिरे ओले

जिले के पिलानी और चिड़ावा क्षेत्र में बुधवार सुबह मौसम ज्यादा सक्रिय दिखा। सुबह करीब 11 बजे के आसपास लगभग 5 मिनट तक बैर के आकार के ओले गिरे। इसके बाद करीब 15 मिनट तक तेज बारिश हुई। ओलावृष्टि से सड़कों और खेतों में पानी भर गया, वहीं ग्रामीण इलाकों में खेतों की मेड़ों पर बर्फ जैसी परत दिखाई दी।

स्थानीय किसानों के मुताबिक, ओलों की तीव्रता भले ही कम समय के लिए रही, लेकिन जिन खेतों में फसल पकने की स्थिति में है, वहां नुकसान की आशंका बढ़ गई है।

रबी की फसलों पर असर, किसानों की बढ़ी चिंता

बारिश और ओलावृष्टि का सबसे ज्यादा असर रबी की फसलों पर पड़ सकता है। जिले में इस समय सरसों, गेहूं और चना की फसलें खेतों में खड़ी हैं।

  • सरसों में फूल और दाने बनने की अवस्था है

  • गेहूं में बालियां निकलने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है

  • चना की फसल भी दाने बनने के चरण में है

विशेषज्ञों का मानना है कि हल्की और सामान्य बारिश को ‘मावठ’ के रूप में सकारात्मक माना जाता है, क्योंकि इससे मिट्टी में नमी बढ़ती है और फसल की ग्रोथ बेहतर होती है। लेकिन यदि बारिश के साथ तेज ओलावृष्टि होती है, तो तैयार फसलों को भारी नुकसान हो सकता है।

मौसम विभाग का अलर्ट: 48–72 घंटे अहम

भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार वर्तमान में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) प्रदेश पर प्रभावी है। इसके चलते आगामी 48 से 72 घंटों के दौरान:

  • न्यूनतम और अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक गिरावट संभव

  • मेघगर्जना के साथ कहीं-कहीं ओलावृष्टि की आशंका

  • जिले के लिए ‘येलो अलर्ट’ जारी

मौसम केंद्र जयपुर ने नागरिकों और किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विशेष रूप से खुले में रखी फसल, पशुधन और कमजोर ढांचों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

शीतलहर का असर, दिन में भी ठंड का अहसास

बुधवार सुबह से बादल छाए रहने और हवाओं की गति बढ़ने से दिन के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। लगातार बादलों की आवाजाही के कारण धूप नहीं निकल सकी, जिससे दिन में भी सर्दी का असर महसूस हुआ। ग्रामीण इलाकों में अलाव जलाते लोग नजर आए।

‘मावठ’ या मुसीबत? खेती के लिए दोधारी तलवार

राजस्थान में सर्दियों के दौरान होने वाली इस तरह की बारिश को ‘मावठ’ कहा जाता है। पारंपरिक रूप से इसे रबी की फसलों के लिए लाभकारी माना जाता है क्योंकि:

  • मिट्टी में प्राकृतिक नमी बढ़ती है

  • सिंचाई की जरूरत कम होती है

  • दाने की गुणवत्ता बेहतर हो सकती है

हालांकि, यदि ओलावृष्टि तेज हो जाए तो यह लाभ तुरंत नुकसान में बदल सकता है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार अगले दो-तीन दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि मौसम स्थिर रहता है और ओले नहीं गिरते, तो यह बारिश किसानों के लिए ‘संजीवनी’ साबित हो सकती है।

आगे क्या?

मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए प्रशासन अलर्ट मोड पर है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे:

  • फसलों की नियमित निगरानी करें

  • खेतों से जल निकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करें

  • ओलावृष्टि की स्थिति में तुरंत कृषि विभाग को सूचना दें

झुंझुनूं में मौसम का यह ‘यू-टर्न’ फिलहाल राहत और चिंता—दोनों लेकर आया है। आने वाले 48 घंटे तय करेंगे कि यह मावठ किसानों के लिए वरदान बनेगी या नुकसान का कारण।


Content Editor

Payal Choudhary

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