झालावाड़ में ‘ऑपरेशन शटरडाउन’ का बड़ा एक्शन: साइबर ठगी के 3 और आरोपी गिरफ्तार, अब तक 51 बदमाश दबोचे!
Friday, Feb 20, 2026-07:51 PM (IST)
राजस्थान के झालावाड़ में सरकारी योजनाओं से जुड़ी बड़े पैमाने की साइबर ठगी के मामले में पुलिस ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों के साथ ही ‘ऑपरेशन शटरडाउन’ के तहत अब तक कुल 51 अभियुक्तों को दबोचा जा चुका है। यह गिरोह केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं में सेंध लगाकर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी कर रहा था और सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा रहा था।
सिम कार्ड के जरिए खुली ठगी की परतें
गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान जितेंद्र कुमार सैनी, विष्णु कुमार सैनी (सिम धारक) और नीरज कुमार सैनी (सिम उपयोगकर्ता) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, ये आरोपी गिरोह को योजनाओं तक पहुंच बनाने और इंटरनेट उपयोग के लिए मोबाइल सिम कार्ड उपलब्ध कराते थे। बरामदगी में कई सिम कार्ड और मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं, जिनका फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है।
तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर तीन दिन की पुलिस रिमांड पर लिया गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन सिम कार्ड्स का उपयोग किन-किन सरकारी पोर्टलों में अनधिकृत लॉगिन के लिए किया गया।
एसपी अमित कुमार का बयान
मामले को लेकर झालावाड़ एसपी अमित कुमार ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं में संगठित साइबर फ्रॉड की सूचना मिलने के बाद विशेष अभियान ‘ऑपरेशन शटरडाउन’ शुरू किया गया था। इस अभियान के तहत पहले ही 48 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका था, जिनमें गिरोह का सरगना भी शामिल है।
एसपी के मुताबिक, यह गिरोह तकनीकी रूप से बेहद सक्रिय था और सरकारी सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर योजनाओं में फर्जी लाभार्थियों को जोड़ रहा था।
मास्टरमाइंड और सरगना की भूमिका
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह के एक प्रमुख मॉड्यूल में मुख्य सरगना रामावतार सैनी, उसका सहयोगी नेटवर्क और मास्टरमाइंड विक्रम सैनी शामिल थे। इन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के विभिन्न स्तरों—तहसील, जिला, राज्य और केंद्र—पर कार्यरत नोडल अधिकारियों की आधिकारिक आईडी को निशाना बनाया।
आरोप है कि आरोपियों ने विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से पासवर्ड क्रैक किए और ओटीपी बाईपास तकनीक अपनाकर सिस्टम में लॉगिन किया। इसके बाद बड़ी संख्या में निष्क्रिय लाभार्थियों को सक्रिय किया गया और भूमि सीडिंग के माध्यम से अपात्र व्यक्तियों को पात्र सूची में शामिल कर दिया गया।
इस पूरे नेटवर्क के जरिए सरकारी खजाने को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह राजस्थान में सरकारी योजनाओं से जुड़ा अब तक का सबसे बड़ा संगठित साइबर फ्रॉड मामला हो सकता है।
एसओजी को सौंपी गई जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसका आगामी अनुसंधान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) को ट्रांसफर कर दिया गया है। एसओजी अब इस गिरोह के वित्तीय लेन-देन, बैंक खातों, डिजिटल ट्रेल और अन्य राज्यों में फैले संभावित नेटवर्क की जांच करेगी।
पुलिस यह भी खंगाल रही है कि क्या इस गिरोह के तार अन्य साइबर अपराध मॉड्यूल से जुड़े हैं या फिर यह नेटवर्क स्वतंत्र रूप से संचालित हो रहा था। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।
