धोलिया गांव की महिलाएं हर्बल साबुन बनाकर बनीं आत्मनिर्भर, राजीविका के सहयोग से बदली जिंदगी
Wednesday, Jan 21, 2026-12:44 PM (IST)
जैसलमेर। जैसलमेर जिले के लाठी क्षेत्र के धोलिया गांव की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की एक सशक्त मिसाल बनकर उभरी हैं। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) जैसलमेर के सांकड़ा ब्लॉक अंतर्गत धोलिया गांव में भोलेनाथ स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने हर्बल और केमिकल फ्री साबुन निर्माण कर अपनी जिंदगी की दिशा बदल दी है।
यहां समूह की महिलाएं नीम, तुलसी, मुल्तानी मिट्टी, गुलाब, एलोवेरा, चारकोल और बकरी के दूध जैसे स्थानीय व प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग कर घर पर ही साबुन तैयार कर रही हैं। इन साबुनों में किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता, जिससे ये त्वचा के लिए लाभदायक और पर्यावरण के अनुकूल हैं।
भोलेनाथ स्वयं सहायता समूह की सदस्य सुरजा बिश्नोई, रामू देवी, शारदा, सुआ सहित अन्य महिलाएं मिलकर यह कार्य कर रही हैं। समूह की अध्यक्ष सुरजा बिश्नोई ने बताया कि इन प्राकृतिक साबुनों की ब्रांडिंग और पैकिंग “अमरा हर्बल” नाम से राजीविका के सहयोग से की गई है। अमरा हर्बल साबुन अलग-अलग फ्लेवर में तैयार किए जा रहे हैं, जिन्हें स्थानीय बाजारों के साथ-साथ राजीविका से जुड़ी जैसलमेर जिले की अन्य बहनों को भी बेचा जा रहा है। इसके अलावा इन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे ऑर्डर मिलने लगे हैं।
इस पूरे प्रयास में राजीविका के अधिकारी निरंतर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और प्रोत्साहन प्रदान कर रहे हैं। राजीविका से जुड़ी अन्य महिला समूह भी इन महिलाओं को आत्मविश्वास और सहयोग दे रही हैं। भविष्य में समूह द्वारा अगरबत्ती और फिनायल निर्माण का कार्य भी शुरू करने की योजना है।
पहले ये महिलाएं पशुपालन, कृषि और वन उत्पाद संग्रह तक ही सीमित थीं, जिससे आय भी सीमित रहती थी। अब स्थानीय संसाधनों को मूल्यवर्धित उत्पादों में बदलकर उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह पहल महिला सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण नवाचार का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गई है, जो अन्य गांवों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध हो रही है।
