जैसलमेर में गोडावण संरक्षण की बड़ी सफलता: अब खुद बन रहे ‘पेरेंट्स’, नेचुरल तरीके से जन्मे चूजे
Saturday, Apr 11, 2026-02:54 PM (IST)
राजस्थान के जैसलमेर से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बेहद सकारात्मक और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। गोडावण (Great Indian Bustard), जो विलुप्ति के कगार पर खड़ा है, अब अपने अस्तित्व को बचाने की दिशा में खुद ही कदम बढ़ा रहा है।
डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) में चल रहे संरक्षण कार्यक्रम के तहत इस साल कुल 11 चूजों का जन्म हुआ है। इनमें से 3 चूजे पूरी तरह प्राकृतिक तरीके यानी ‘नेचुरल मैटिंग’ से पैदा हुए हैं। यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि अब तक इन पक्षियों को बचाने के लिए कृत्रिम प्रजनन (AI) और इंसानी देखरेख पर निर्भर रहना पड़ता था।
अब खुद संभाल रहे अपनी आबादी
संरक्षण कार्यक्रम के चौथे चरण में यह सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अब तक जंगल से अंडे लाकर उन्हें इनक्यूबेशन के जरिए विकसित किया जाता था, लेकिन अब संरक्षण केंद्रों—रामदेवरा और सुदासरी—में मौजूद गोडावण खुद जोड़े बनाकर अंडे दे रहे हैं और चूजों का जन्म हो रहा है।
यह संकेत है कि पक्षी अब कैप्टिविटी में सहज और तनावमुक्त हैं, जो उनके प्राकृतिक व्यवहार के लौटने का बड़ा संकेत है।
79 पक्षियों को खुले वातावरण में छोड़ने की तैयारी
वन विभाग अब तक तैयार हुए करीब 79 गोडावणों को धीरे-धीरे खुले वातावरण में छोड़ने की योजना बना रहा है। पहले यह आशंका थी कि कैद में पले पक्षी खुले जंगल में सर्वाइव नहीं कर पाएंगे, लेकिन अब चूजों की सेहत और व्यवहार ने वैज्ञानिकों का भरोसा बढ़ा दिया है।
'थार कवच’ से सुरक्षा
इन पक्षियों को सुरक्षित रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। ग्रासलैंड में ‘प्रिडेटर-प्रूफ’ बाड़े बनाए गए हैं, ताकि जंगली जानवरों से सुरक्षा मिल सके। इसके अलावा हाई-टेंशन बिजली लाइनों पर ‘बर्ड डाइवर्टर’ लगाए गए हैं, जिससे उड़ान के दौरान टकराव से बचाव हो सके।
अब वैज्ञानिक सिर्फ केयरटेकर
DFO बृजमोहन गुप्ता के अनुसार, “2019 में जब यह अभियान शुरू हुआ था, तब चुनौतियां काफी बड़ी थीं। आज हमारे पास 33 मूल (फाउंडर) पक्षियों के अलावा 46 ऐसे पक्षी हैं, जो यहीं पैदा हुए हैं। सबसे बड़ी सफलता यह है कि अब वैज्ञानिक सिर्फ केयरटेकर की भूमिका में हैं और पक्षी खुद अपनी आबादी बढ़ा रहे हैं।”
क्यों खास है यह उपलब्धि?
- नेचुरल ब्रीडिंग: बिना इंसानी दखल के प्रजनन, जो पक्षियों के स्वस्थ व्यवहार को दर्शाता है
- सर्वाइवल रेट: एक साथ 11 चूजों का जन्म, संरक्षण प्रयासों की बड़ी सफलता
- ईको सिस्टम संकेत: गोडावण की बढ़ती संख्या थार के ग्रासलैंड इकोसिस्टम के स्वस्थ होने का संकेत
भविष्य की उम्मीद
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इसी तरह प्राकृतिक प्रजनन जारी रहा, तो अगले 5 वर्षों में गोडावण की आबादी सुरक्षित स्तर तक पहुंच सकती है।
कुल मिलाकर, जैसलमेर से आई यह खबर न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है। यह दिखाती है कि सही दिशा में किए गए संरक्षण प्रयास न सिर्फ सफल हो सकते हैं, बल्कि प्रकृति खुद भी अपने अस्तित्व को बचाने में सक्षम है।
