जैसलमेर में मजिस्ट्रेट की पहल: बच्चों को साइबर क्राइम से बचने की सीख, शिकायत पेटी से मिलेगा तुरंत न्याय!

Tuesday, Apr 07, 2026-03:46 PM (IST)

राजस्थान के जैसलमेर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की एक सराहनीय पहल सामने आई है, जहां ‘ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे’ अभियान के तहत न्यायिक अधिकारी स्कूलों में पहुंचकर विद्यार्थियों को साइबर क्राइम से बचने के उपाय सिखा रहे हैं। इस अभियान का उद्देश्य बच्चों को न केवल जागरूक बनाना है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और भरोसेमंद वातावरण भी देना है, जहां वे अपनी समस्याएं खुलकर साझा कर सकें।

इस अभियान के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव एवं मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) विजेंद्र कुमार ने स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने बच्चों को साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बारे में विस्तार से जानकारी दी और उनसे बचने के आसान लेकिन महत्वपूर्ण तरीके बताए।

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि स्कूल परिसर में एक विशेष ‘शिकायत पेटी’ (Complaint Box) भी स्थापित की गई। इस पहल के जरिए छात्रों को यह भरोसा दिलाया गया कि वे बिना किसी डर या झिझक के अपनी कोई भी समस्या—चाहे वह साइबर अपराध से जुड़ी हो या किसी अन्य कानूनी मुद्दे से—इस पेटी में डाल सकते हैं।

CJM विजेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि यह शिकायत पेटी हर तीन दिन में खोली जाएगी और उसमें प्राप्त सभी वैध शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि बच्चों की पहचान और गोपनीयता का पूरा ध्यान रखा जाएगा, जिससे वे निडर होकर अपनी बात रख सकें।

अपने संबोधन में उन्होंने मोबाइल और इंटरनेट के उपयोग को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में जहां तकनीक ने जीवन को आसान बनाया है, वहीं इसके खतरे भी तेजी से बढ़े हैं। खासकर सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए बच्चों और बुजुर्गों को निशाना बनाना साइबर अपराधियों के लिए बेहद आसान हो गया है।

उन्होंने छात्रों को कुछ महत्वपूर्ण सावधानियां भी बताईं। जैसे कि किसी अनजान व्यक्ति द्वारा भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें, ओटीपी (OTP) किसी के साथ साझा न करें और लालच देने वाले विज्ञापनों या फर्जी कॉल्स से दूर रहें। उन्होंने यह भी कहा कि बच्चे अपने घर के बुजुर्गों को भी इन खतरों के बारे में जागरूक करें, क्योंकि अक्सर साइबर ठगी का सबसे ज्यादा शिकार वही होते हैं।

इस दौरान उन्होंने बच्चों को उनके मौलिक अधिकारों और कर्तव्यों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य समाज के हर वर्ग को सुलभ और किफायती न्याय प्रदान करना है। यदि किसी छात्र या उसके परिवार को किसी भी प्रकार की कानूनी सहायता की जरूरत होती है, तो वे सीधे प्राधिकरण के कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।

स्कूल के प्रिंसिपल और शिक्षकों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे जागरूकता कार्यक्रम छात्रों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और उन्हें साइबर अपराध जैसी चुनौतियों के लिए पहले से तैयार करते हैं। इससे छात्रों में जागरूकता बढ़ती है और वे डिजिटल दुनिया में अधिक सुरक्षित तरीके से आगे बढ़ पाते हैं।

कुल मिलाकर, जैसलमेर में शुरू किया गया यह अभियान न केवल बच्चों को जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि उन्हें एक सुरक्षित और सशक्त भविष्य की ओर ले जाने की पहल भी है।


Content Editor

Payal Choudhary

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