पुष्कर मेले का भव्य समापन! बस्सी नागा, जोबनेर के दो मादा अश्व बने विजेता

Thursday, Nov 06, 2025-09:01 AM (IST)

अजमेर। राजस्थान के विश्व प्रसिद्ध पुष्कर पशु मेले का समापन भव्य रूप से हुआ, जिसमें एक बार फिर मारवाड़ी अश्वों की महिमा का बखान किया गया। इस साल के मेले में जयपुर स्टड फ़ार्म के दो मादा अश्वों, जो कि बस्सी नागा, जोबनेर से हैं, ने “दो-दाँत बच्छेरी प्रतियोगिता” में क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया। यह उपलब्धि क्षेत्र के अश्व पालकों और अश्व प्रेमियों के लिए गर्व का कारण बनी है, क्योंकि जयपुर में उच्च गुणवत्ता वाले मारवाड़ी अश्व फार्मों की संख्या में वृद्धि हो रही है।

 

जयपुर स्टड फ़ार्म के मालिक मुकेश वर्मा कुमावत ने इस सफलता पर खुशी जताते हुए कहा, “हमारे लिए यह बहुत बड़ी उपलब्धि है कि हमारी दो मादा अश्वों ने इस प्रतियोगिता में शीर्ष स्थानों पर जगह बनाई है और हमारे फार्म का नाम रोशन किया है। यह हमारे क्षेत्र और राजस्थान के लिए गर्व की बात है।”

PunjabKesari

पशुओं का जमकर होता है व्यापार
पुष्कर मेला मुख्य रूप से पशु व्यापार के लिए प्रसिद्ध है। इस दौरान यहां ऊंट, गाय, बकरियां, घोड़े, मुर्गे आदि की भारी तादाद में खरीद-फरोख्त होती है। खासकर ऊंटों का व्यापार इस मेले का सबसे प्रमुख आकर्षण है। पुष्कर मेला ऊंटों, घोड़ों और अन्य जानवरों के मालिकों के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापारिक अवसर है, जहां व्यापारी अपने पशुओं को बेहतर मूल्य के लिए बेचने के लिए आते हैं।

 

पशुओं का आंकड़ा पहुंचा 5000 पार
विश्व प्रसिद्ध पुष्कर मेला इस बार भी सुर्खियों में आया। हर साल की तरह इस बार भी देश भर से ऊंटों और घोड़ों ने मेले की शोभा बढ़ाई। पुष्कर स्थित रेतीले धोरों में जमकर पशु आए। इस बार पुष्कर में 1315 ऊंटों की आवक दर्ज हुई। तो वहीं, 467 अश्व राजस्थान के बाहरी राज्यों से आए हैं। पुष्कर मेले में 5000 के आसपास पशु पहुंचे जिनमें 3000 से ज्यादा घोड़ा-घोड़ी शामिल हैं। पुष्कर पशु मेले में पहले ऊंटों की संख्या अधिक रहती थी लेकिन अब धीरे धीरे घोड़े और घोड़ियों की संख्या ज्यादा रहती है।

 

ऊंटों की सजावट और प्रदर्शन केंद्र
इसमें एक और खास बात ये है कि जहां 467 अश्व राजस्थान के बाहरी राज्य से आये हैं वहीं एक भी ऊंट वंश राजस्थान के बाहर से नहीं आया है। यहां पर अधिकांश ऊंट बीकानेर, गंगानगर, हनुमानगढ़ और जोधपुर संभाग से आए हैं। इन ऊटों की सजावट और प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र बना। हर बार की तरह इस बार भी मारवाड़ी नस्ल के घोड़े मेले में घोड़ा प्रेमियों की पहली पसंद बने।

 

विश्वविद्यालयों और शोधकर्ताओं के लिए अध्ययन का क्षेत्र
पुष्कर मेला भारतीय ग्रामीण जीवन, पशुपालन, और व्यापार के बारे में शोध करने वाले शोधकर्ताओं और विश्वविद्यालयों के लिए भी एक आदर्श स्थान है। यहां पर विभिन्न प्रकार की जानवरों की नस्लों का अवलोकन करने और उनके संरक्षण के बारे में अध्ययन किया जा सकता है।


Content Editor

Anil Jangid

सबसे ज्यादा पढ़े गए

Related News