राजस्थान में मुद्रा योजना का बड़ा असर, 2.55 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को मिला ₹2.18 लाख करोड़ का ऋण

Tuesday, Aug 04, 2026-04:43 PM (IST)

जयपुर, 4। राजस्थान में छोटे कारोबार, लघु उद्योग और रेहड़ी-पटरी से जुड़े लोगों के आर्थिक सशक्तीकरण में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश में अब तक 2 करोड़ 55 लाख से अधिक लाभार्थियों को संस्थागत वित्त पोषण मिला है।

राजस्थान में 2.55 करोड़ से ज्यादा लाभार्थियों को मिला ऋण

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत राजस्थान में 2 करोड़ 55 लाख 91 हजार 381 लाभार्थियों के लिए कुल 2 लाख 18 हजार 423 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया गया है। इनमें 1 करोड़ 54 लाख 15 हजार से अधिक महिलाएं शामिल हैं, जिन्हें 67 हजार 982 करोड़ रुपये से अधिक का मुद्रा ऋण मिला है। इस तरह योजना में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 60 प्रतिशत रही है।

वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में ही 23 लाख से अधिक लाभार्थियों को 31 हजार 460 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया जा चुका है।

देशभर में 59 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिला लाभ

केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक अतारांकित प्रश्न के जवाब में बताया कि असंगठित क्षेत्र को बिना गारंटी ऋण उपलब्ध कराने में मुद्रा योजना ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। जून 2026 तक देशभर में 59 करोड़ 14 लाख से अधिक लोगों को 41 लाख 71 हजार करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया जा चुका है।

2015 में शुरू हुई थी मुद्रा योजना

गैर-कॉरपोरेट और छोटे उद्यमों को 20 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री मुद्रा योजना की शुरुआत वर्ष 2015 में की गई थी। योजना के तहत लाभार्थी अपनी वित्तीय जरूरत के अनुसार शिशु, किशोर, तरुण और तरुण प्लस श्रेणी में ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं।

छोटे कारोबारियों और कारीगरों को मिल रहा सहारा

मुद्रा योजना के जरिए विनिर्माण इकाइयों, दुकानदारों, फल-सब्जी विक्रेताओं, ट्रक-टैक्सी ऑपरेटरों, खाद्य सेवा इकाइयों, मशीन ऑपरेटरों, छोटे उद्योगों, कारीगरों, खाद्य प्रसंस्करणकर्ताओं और रेहड़ी-पटरी वालों को ऋण उपलब्ध कराया जा रहा है। इससे छोटे कारोबारियों को अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है।

योजना के लाभार्थियों में बड़ी संख्या अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से जुड़े लोगों की है। ऐसे लोग पहले अक्सर साहूकारों, दोस्तों या रिश्तेदारों जैसे गैर-औपचारिक स्रोतों से कर्ज लेते थे। मुद्रा योजना के माध्यम से उन्हें संस्थागत वित्त तक पहुंच मिल रही है, जिससे यह योजना आर्थिक उन्नति का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।


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LUCKY SHARMA

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