SMS अस्पताल में नियमों की अनदेखी: गिरफ्तार डॉ. सोमदेव बंसल बिना सीनियर कंसल्टेंसी के भर्ती!
Tuesday, Apr 14, 2026-03:56 PM (IST)
राजस्थान की राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) हॉस्पिटल में एक गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। गिरफ्तार डॉक्टर डॉ. सोमदेव बंसल को बिना सीनियर डॉक्टर की कंसल्टेंसी के अस्पताल में भर्ती कर लिया गया, जिससे मेडिकल प्रोटोकॉल पर सवाल खड़े हो गए हैं।
गिरफ्तारी के बाद बिगड़ी तबीयत
जानकारी के अनुसार, निविक हॉस्पिटल से जुड़े डॉ. सोमदेव बंसल को 12 अप्रैल को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के कुछ ही घंटों बाद उनकी तबीयत खराब होने की सूचना मिली, जिसके बाद उन्हें SMS अस्पताल लाकर भर्ती कराया गया।
प्रोटोकॉल की अनदेखी
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठा है कि एक लीगल केस के मरीज को बिना सीनियर डॉक्टर की सलाह के सीधे जनरल मेडिसिन वार्ड में कैसे भर्ती कर लिया गया।
मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों के अनुसार, किसी भी मरीज को किस विभाग में भर्ती करना है, यह निर्णय केवल सीनियर डॉक्टर ही लेते हैं। लेकिन इस मामले में एक रेजीडेंट डॉक्टर ने खुद ही भर्ती कर वार्ड में शिफ्ट कर दिया, जो नियमों के खिलाफ है।
मेडिसिन विभाग की नाराजगी
इस लापरवाही पर मेडिसिन विभाग के एचओडी ने नाराजगी जताई है। विभाग की ओर से लिखे गए पत्र में स्पष्ट किया गया है कि भर्ती पर्ची पर न तो किसी रेजीडेंट डॉक्टर के हस्ताक्षर हैं और न ही किसी सीनियर डॉक्टर की कंसल्टेंसी ली गई है।
यह स्थिति अस्पताल की कार्यप्रणाली और प्रोटोकॉल पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
प्रशासन की चुप्पी
इस पूरे मामले पर अस्पताल अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन की चुप्पी भी इस मामले को और विवादास्पद बना रही है।
मेडिकल बोर्ड का गठन
मामले की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल प्रशासन ने एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया है। इस बोर्ड में कार्डियक, न्यूरोलॉजी, जनरल मेडिसिन और फोरेंसिक मेडिसिन विभाग के विशेषज्ञ डॉक्टर शामिल हैं।
हालांकि 24 घंटे से अधिक समय बीतने के बाद भी सभी जांचें पूरी नहीं हो सकी हैं, जिससे प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
जांच रिपोर्ट सामान्य
प्रारंभिक जांच में डॉ. सोमदेव बंसल की ब्लड जांच, ईसीजी और सीटी स्कैन की रिपोर्ट सामान्य पाई गई है। इसके बावजूद आगे की जांच के लिए अन्य टेस्ट कराए गए हैं, जिनकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
इन्हीं रिपोर्ट्स के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
‘जेल से बचने का जरिया’ बनता अस्पताल?
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब पहले भी आरोप लगते रहे हैं कि प्रभावशाली आरोपी जेल से बचने के लिए अस्पताल में भर्ती हो जाते हैं।
इससे पहले भी एक अन्य मामले में गिरफ्तार डॉक्टर ने बीमारी का हवाला देकर अस्पताल में भर्ती ली थी, लेकिन बाद में सभी जांच रिपोर्ट सामान्य आने पर उसे वापस जेल भेज दिया गया था।
निष्कर्ष
SMS अस्पताल का यह मामला न केवल मेडिकल प्रोटोकॉल की अनदेखी को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि सिस्टम में सुधार की कितनी जरूरत है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और भविष्य में ऐसी लापरवाहियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
