एमएसएमई और स्टार्टअप भारत की अर्थव्यवस्था की धड़कन : गजेन्द्र सिंह शेखावत
Thursday, Aug 28, 2025-08:21 PM (IST)

नई दिल्ली । केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) और स्टार्टअप भारत की अर्थव्यवस्था की धड़कन हैं। ये नवाचार को बढ़ावा देते हैं, रोजगार के अवसर पैदा करते हैं और विश्व मंच पर भारत की उद्यमशीलता की भावना को प्रदर्शित करते हैं। इसी ताकत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का विकसित भारत का सपना पूरा होगा।
गुरुवार को भारत मंडपम् में 11वें इंडिया इंटरनेशनल एमएसएमई ट्रेड फेयर एंड एक्सपो- 2025 में 'विकसित भारत- द गोल्डन स्पैरो@2047' विषय पर अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि यह अत्यंत प्रेरणादायक और दूरदर्शी विषय है, जो वर्ष 2047 तक भारत को एक समावेशी, आत्मनिर्भर और पूर्णतः विकसित राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है। 6 करोड़ से अधिक उद्यमों के साथ एमएसएमई न केवल करोड़ों लोगों को रोज़गार देता है, बल्कि औद्योगिक क्लस्टरों को मजबूती देता है। पारंपरिक हस्तशिल्प को संजोता है। हमारे निर्यात को शक्ति प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि एमएसएमई भारत की जीडीपी का लगभग 30 प्रतिशत योगदान करते हैं। 11 करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार प्रदान करते हैं। ये आंकड़े केवल नीतियों की नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आशाओं और गरिमा से जुड़ी कहानियों का प्रतीक हैं।
शेखावत ने कहा कि एमएसएमई ‘विकसित भारत’ की कल्पना को इसलिए महत्वपूर्ण बनाते हैं, क्योंकि सच्चा विकास वही होता है, जो समृद्धि को समाज के हर कोने तक पहुंचाए। जब कच्छ की एक कुम्हारिन अपने मिट्टी के बर्तन विदेशों में बेच पाती है, जब हिमाचल के पहाड़ों में एक होम स्टे में ठहरने वाले सैलानी स्थानीय अनुभवों को अपनाते हैं या जब एक टियर-2 शहर की युवा उद्यमी अपने हस्तशिल्प कारोबार को डिजिटल माध्यम से आगे बढ़ाती है तो यह केवल आय अर्जित करने का जरिया नहीं होता, बल्कि पूरे समुदाय के बदलाव का माध्यम भी होता है।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की सांस्कृतिक और सभ्यतागत विरासत एमएसएमई से अत्यंत गहराई से जुड़ी है। पर्यटन कोई ऊपर से थोपने वाला उत्पाद नहीं है, बल्कि यह एक जीवंत ताना-बाना है, जिसे अनगिनत छोटे उद्यमों और लोगों ने मिलकर बुना है। चाहे वह होम स्टे चलाने वाला व्यक्ति हो, जो स्थानीय मेहमान नवाजी की परंपराओं को सहेजता है या वह शिल्पकार हो, जो सदियों पुरानी कलाओं को जीवित रखता है या फिर वह स्थानीय गाइड हो, जो इतिहास को अपने अनुभवों के साथ जीवंत रूप में सुनाता है। ये सभी एमएसएमई ही हैं, जो धरातल पर सक्रिय रूप से भारत की संस्कृति और पर्यटन को आगे बढ़ा रहे हैं।
अमेरिकी टैरिफ की चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि हर युग अपनी कुछ चुनौतियां लेकर आता है। अमेरिका ने कुछ भारतीय उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगा दिए हैं, जो कुछ मामलों में 50 प्रतिशत तक पहुंच गए हैं। इसका सीधा असर वस्त्र, रत्न-आभूषण, चमड़ा, समुद्री उत्पाद, कुछ इंजीनियरिंग सामान, हस्तशिल्प जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों पर पड़ा है। इन सभी में एमएसएमई की भागीदारी सबसे अधिक है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने इस चुनौती का त्वरित और ठोस जवाब दिया है। एमएसएमई की लिक्विडिटी को सुरक्षित रखने के लिए इमरजेंसी क्रेडिट और गारंटी ड्रॉबैक योजनाओं का विस्तार किया गया है। सरकार द्वारा अफ्रीका, यूरोपीय संघ, दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका जैसे क्षेत्रों में विशेष रूप से नए बाजारों के अवसर तलाशे जा रहे हैं। इनका उद्देश्य यह है कि हमारे निर्यातकों को नए अवसर मिलें और वे केवल कुछ सीमित देशों पर निर्भर न रहें। इस तरह हम अपने निर्यात को ज्यादा मजबूत, विविध और स्थिर बना सकते हैं। शेखावत ने कार्यक्रम में मौजूद उद्यमियों से आग्रह किया कि वो इस एक्सपो द्वारा प्रदान किए गए मंचों का पूरा लाभ उठाएं। उन्होंने उपस्थित विदेशी मित्रों और संभावित निवेशकों से कहा कि भारत के एमएसएमई आपके लिए भरोसेमंद साझेदार है।