खेजड़ी बचाओ आंदोलन: केके विश्नोई का बड़ा ऐलान, सरकार लिखित आश्वासन देगी; अमृता देवी का बलिदान नहीं भूलेंगे
Thursday, Feb 05, 2026-02:32 PM (IST)
बीकानेर. राजस्थान के बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन में चार दिनों से जारी गतिरोध आखिरकार टूटता नजर आ रहा है। कलेक्ट्रेट के सामने महापड़ाव के बीच गुरुवार को प्रदेश सरकार के मंत्री केके विश्नोई ने मंच से बड़ी घोषणा की। मंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल और आंदोलनकारियों के बीच हुई वार्ता के बाद सरकार ने नरमी दिखाते हुए आंदोलनकारियों की मांगों पर सकारात्मक कदम उठाए हैं।
मंत्री विश्नोई ने मंच से घोषणा की कि सरकार खेजड़ी संरक्षण के मुद्दे पर पूरी तरह गंभीर है और आंदोलनकारियों की मांगों पर लिखित में आश्वासन दिया जाएगा। इसका उद्देश्य भविष्य में खेजड़ी वृक्षों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह घोषणा आंदोलनकारियों के लिए एक बड़ी नैतिक जीत मानी जा रही है, क्योंकि वे लंबे समय से 'ट्री एक्ट' जैसी सख्त कानूनी मांगों को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे।
विश्नोई ने बिश्नोई समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए कहा, “हम मां अमृता देवी के बलिदान को याद करते हैं और उनकी विरासत व पर्यावरण संरक्षण के संकल्प को झुकने नहीं देंगे।” मंत्री के इस बयान के बाद आंदोलनकारियों के बीच अनशन खत्म करने की चर्चाएं तेज हो गई हैं, हालांकि लिखित आश्वासन मिलने तक महापड़ाव जारी रहने की संभावना है।
आंदोलन की जड़ पश्चिमी राजस्थान के सोलर पावर प्रोजेक्ट्स में है। आंदोलनकारियों का आरोप है कि विकास के नाम पर बीकानेर संभाग में हजारों खेजड़ी के पेड़ों को बेरहमी से काटा जा रहा है। कई जगहों पर पेड़ों को काटकर रात के अंधेरे में जमीन में गाड़ देने की शिकायतें भी सामने आई हैं।
वर्तमान में अवैध कटाई पर केवल 1000 रुपये का मामूली जुर्माना है, जिसे अपराधी आसानी से भरकर बच जाते हैं। आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि इसे गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में डाला जाए और खेजड़ी संरक्षण के लिए एक कड़ा विशेष कानून (Tree Act) बनाया जाए। इसके अलावा खेजड़ी को धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर घोषित करने की भी मांग है।
यह आंदोलन बिश्नोई समाज के गौरवशाली खेजड़ली बलिदान (1730 ई.) की याद दिलाता है, जहां 363 लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। बीकानेर के महापड़ाव में 3 फरवरी से करीब 480 लोग, जिनमें 29 संत और 60 महिलाएं शामिल हैं, अन्न-जल त्याग कर आमरण अनशन पर बैठे हैं। संतों द्वारा सरकार को दिए गए 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद ही प्रशासन और मंत्रियों का प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए पहुंचा। यह आंदोलन अब गंभीर मोड़ पर है और आने वाले दिनों में खेजड़ी संरक्षण की दिशा में ठोस कदम उठाने की उम्मीद है।
