खेजड़ी बचाओ आंदोलन पर दो राय: मंत्री बोले-आंदोलन समाप्त, बिश्नोई समाज का ‘महा पड़ाव’ जारी
Thursday, Feb 05, 2026-05:25 PM (IST)
बीकानेर। राज्य वृक्ष खेजड़ी की कटाई को लेकर चल रहे खेजड़ी बचाओ आंदोलन को लेकर अब दो अलग-अलग तस्वीरें सामने आ रही हैं। जहां सरकार की ओर से आंदोलन समाप्त होने का दावा किया गया है, वहीं धरना स्थल पर मौजूद साधु-संतों, पर्यावरण प्रेमियों और बिश्नोई समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि ‘महा पड़ाव’ अब भी जारी है और लिखित आश्वासन के बावजूद पूरी संतुष्टि नहीं मिली है।
लंबे समय से चल रहे अनशन और आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने लिखित आश्वासन दिया कि बीकानेर और जोधपुर संभाग में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई नहीं की जाएगी। इस आश्वासन के बाद सहमति बनने की बात सामने आई, लेकिन आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि यह घोषणा केवल दो संभागों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि पूरे राजस्थान में खेजड़ी संरक्षण को लेकर स्पष्ट और व्यापक आदेश जारी किए जाएं। उनका कहना है कि जब तक पूरे राज्य के लिए स्पष्ट निर्णय नहीं होता, तब तक धरना समाप्त करने पर अंतिम फैसला नहीं लिया जाएगा। खबर लिखे जाने तक बातचीत का दौर जारी रहा।
धरना स्थल पर मौजूद युवाओं ने आमरण अनशन समाप्त करने के प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया और आंदोलन जारी रखने की बात कही। आंदोलनकारियों का कहना है कि लिखित आश्वासन सकारात्मक कदम जरूर है, लेकिन वे स्थायी और स्पष्ट नीति चाहते हैं ताकि भविष्य में खेजड़ी जैसे पर्यावरणीय और सांस्कृतिक महत्व वाले पेड़ों की कटाई पर पूर्ण रोक सुनिश्चित हो सके।
इधर, मंत्री केके बिश्नोई ने मीडिया से बातचीत में कहा कि सरकार ने साधु-संतों और समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए वही किया है जो कहा गया था। उन्होंने दावा किया कि आंदोलन समाप्त हो चुका है और सरकार किसी भी स्तर पर समझौते से पीछे नहीं हटी। मंत्री ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की प्रशंसा करते हुए उन्हें जनहितैषी नेता बताया और कहा कि उनके नेतृत्व में सरकार ने समय रहते जनभावनाओं को समझते हुए निर्णय लिया।
मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक तत्वों ने आंदोलन को भटकाने और राजनीतिक रंग देने का प्रयास किया, लेकिन सरकार ने इन प्रयासों से प्रभावित हुए बिना समाधान पर ध्यान केंद्रित रखा। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य कभी भी पर्यावरण या समाज की आस्था को नुकसान पहुंचाना नहीं था, बल्कि जनहित और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिया गया।
इस तरह खेजड़ी बचाओ आंदोलन को लेकर एक ओर सरकार आंदोलन समाप्त होने की बात कह रही है, जबकि दूसरी ओर बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों का ‘महा पड़ाव’ अभी जारी है और आंदोलनकारी पूरे राजस्थान के लिए स्पष्ट और ठोस निर्णय की मांग पर अड़े हुए हैं।
