आधी रात का फैसला, बदली सीमाएं: बाड़मेर–बालोतरा पुनर्गठन पर क्यों मचा सियासी बवाल?
Sunday, Jan 04, 2026-03:41 PM (IST)
अगर किसी जिले का मुख्यालय जनता से और दूर कर दिया जाए, काम आसान होने के बजाय और जटिल हो जाए और यह फैसला आधी रात को अधिसूचना जारी कर बदल दिया जाए, तो सवाल उठना लाज़मी है। बाड़मेर–बालोतरा में ठीक यही हुआ और इसी से राजस्थान की राजनीति में एक नई बहस ने जन्म ले लिया। 31 दिसंबर की देर रात जिलों की सीमाओं में बदलाव की अधिसूचना जारी हुई और सुबह होते-होते यह मामला सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कहीं फैसले को लेकर संतोष दिखा, तो कई इलाकों में नाराज़गी सामने आई।
जिलों के पुनर्गठन के बाद बालोतरा जिले की नई प्रशासनिक संरचना सामने आई है। अब बालोतरा जिले में 5 उपखंड, 9 तहसील और 5 उपतहसील शामिल हैं। गुड़ामालानी और धोरीमन्ना उपखंड को बालोतरा जिले में शामिल किया गया है, जबकि बायतू उपखंड को बाड़मेर जिले में रखा गया है। वहीं बायतू उपखंड की गिड़ा और पाटोदी तहसील को बालोतरा जिले में जोड़ा गया है। यह संशोधन 7 अगस्त 2023 को बालोतरा को नया जिला बनाए जाने के दौरान जारी अधिसूचना में किया गया बदलाव है।
प्रशासनिक दस्तावेज़ों में यह बदलाव भले ही तकनीकी दिखाई दे, लेकिन इसका सीधा असर आम जनता की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता है। लोगों का कहना है कि जिन क्षेत्रों को बालोतरा में शामिल किया गया, वहां के निवासियों के लिए जिला मुख्यालय की दूरी कम होने के बजाय बढ़ गई है, जिससे कामकाज और प्रशासनिक पहुंच और कठिन हो गई है।
इसी मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सरकार पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने इस फैसले को “तुगलकी फरमान” बताते हुए कहा कि यह निर्णय प्रशासनिक जरूरतों के बजाय राजनीतिक गणित को ध्यान में रखकर लिया गया है। गहलोत के अनुसार, यह बदलाव जनभावनाओं के खिलाफ है और आने वाले परिसीमन व चुनावी समीकरणों से जुड़ा हुआ है।
पूरा मामला यह सवाल खड़ा करता है कि क्या जिला पुनर्गठन का उद्देश्य जनता की सुविधा है या फिर सियासी संतुलन साधना। सीमाएं बदल दी गई हैं, लेकिन बाड़मेर और बालोतरा में उठी बहस अभी थमी नहीं है। अब देखना होगा कि सरकार इस फैसले पर क्या ठोस जवाब देती है या यह मुद्दा आगे और बड़ा राजनीतिक रूप लेता है।
