“चुनाव मैं नहीं, भाजपा हारी थी” — महेंद्रजीत सिंह मालवीया का बड़ा बयान, कांग्रेस में जाने के फैसले पर अडिग
Thursday, Jan 15, 2026-02:46 PM (IST)
आनंदपुरी (बांसवाड़ा)। पूर्व मंत्री और आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने भाजपा सरकार और संगठन पर दबाव की राजनीति करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने के अपने फैसले पर पूरी तरह अडिग हैं और किसी भी दबाव में पीछे हटने वाले नहीं हैं। कांग्रेस में घर वापसी के महज तीसरे दिन उनके कारोबारी ठिकानों पर एसीबी की कार्रवाई के बाद मालवीया ने बुधवार को अपने गांव नाहरपुरा (आनंदपुरी) में जनसभा कर खुलकर अपनी बात रखी।
“विकास के लिए भाजपा छोड़ी”
भाजपा छोड़ने के कारणों पर सवाल के जवाब में मालवीया ने कहा कि उनका फैसला विकास और जनता के काम को लेकर था। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएसपी (जनजातीय उपयोजना) क्षेत्र में भाजपा सरकार पूरी तरह विफल रही।
मालवीया ने कहा, “किसान खाद के संकट से जूझते रहे, मनरेगा मजदूरों का भुगतान दो-दो साल से अटका हुआ है। ऐसे में आदिवासी क्षेत्र में भाजपा कैसे चल सकती है?”
एसीबी कार्रवाई पर दिया जवाब
एसीबी की टीम द्वारा पूछताछ को लेकर मालवीया ने कहा कि अधिकारियों ने उनके पेट्रोल पंप और क्रशर गिट्टी प्लांट से जुड़े दस्तावेजों की जानकारी ली।
उन्होंने स्पष्ट किया, “लाइसेंस कब से है, कितनी बिक्री होती है, पैसा कैसे जमा होता है—सब कुछ ऑनलाइन है। इसमें कुछ भी छिपाने जैसा नहीं है।”
मालवीया ने इसे राजनीतिक दबाव से जोड़ते हुए कहा कि कांग्रेस जॉइन करने के तुरंत बाद इस तरह की कार्रवाई संदेह पैदा करती है।
“फैसला नहीं बदलूंगा”
अपने राजनीतिक भविष्य पर मालवीया ने दो टूक कहा कि उन्होंने 11 जनवरी को कांग्रेस को औपचारिक सदस्यता प्रस्ताव भेज दिया था।
“कोई कितना भी दबाव डाल ले, मैं अपना फैसला नहीं बदलूंगा,”—यह कहते हुए उन्होंने भाजपा को स्पष्ट संदेश दिया।
चुनाव हार पर भाजपा को घेरा
भाजपा द्वारा उन्हें दो मौके देने के सवाल पर मालवीया ने कहा, “मैं यह नहीं नकारता कि मुझे अवसर मिले, लेकिन यहां मैं नहीं हारा—भाजपा पार्टी हारी थी।”
इस बयान को राजनीतिक हलकों में भाजपा नेतृत्व पर सीधा हमला माना जा रहा है।
पत्नी भी होंगी कांग्रेस में शामिल
महेंद्रजीत सिंह मालवीया ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी पत्नी भी जल्द कांग्रेस का दामन थामेंगी। उन्होंने कहा, “एक घर में दो पार्टी कैसे रह सकती हैं।”
बीएपी और कांग्रेस पर टिप्पणी
भारत आदिवासी पार्टी (BAP) को लेकर उन्होंने माना कि यह कांग्रेस के लिए चुनौती है, लेकिन साथ ही कहा कि इतिहास गवाह है कि इससे पहले मामा बालेश्वर दयाल की पार्टी इससे भी ज्यादा प्रभावी थी, जो समय के साथ समाप्त हो गई।
जिला अध्यक्ष से मतभेद पर सफाई
कांग्रेस जिला अध्यक्ष अर्जुन बामनिया से मतभेद के सवाल पर मालवीया ने कहा कि पार्टी में उन्हें किसी से चुनौती नहीं है।
“मतभेद हो सकते हैं, लेकिन मनभेद नहीं,”—कहते हुए उन्होंने एकजुटता का संदेश दिया।
महेंद्रजीत सिंह मालवीया के इन बयानों से साफ है कि वे अब कांग्रेस में अपनी नई राजनीतिक पारी के लिए पूरी तरह तैयार हैं और भाजपा से किसी भी सुलह की संभावना को सिरे से खारिज कर चुके हैं।
