महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन का 42वां सम्मान समारोह सम्पन्न, प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को किया गया सम्मानित
Monday, Mar 16, 2026-07:07 PM (IST)
उदयपुर: मेवाड़ की प्राचीन और गौरवशाली परंपराओं को आगे बढ़ाते हुए महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने फाउंडेशन द्वारा आयोजित 42वें सम्मान समारोह में मानव मूल्यों की विशिष्ट विभूतियों तथा देश के भविष्य माने जाने वाले प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अलंकृत किया। यह समारोह मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत, सेवा भावना और समाज के प्रति समर्पण की परंपरा का प्रतीक बनकर आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों और युवा प्रतिभाओं का सम्मान किया गया।
समारोह का शुभारंभ मंच पर दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर परमेश्वरजी महाराज श्री एकलिंगनाथजी को नमन करते हुए फाउंडेशन के संस्थापक महाराणा भगवत सिंह जी मेवाड़ को पुष्पांजलि अर्पित की गई। परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत की गई, जिससे समारोह का वातावरण श्रद्धा, सम्मान और गौरव से भर उठा। इस अवसर पर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने अपने पूर्वजों का स्मरण करते हुए अपने पिता महाराणा अरविन्द सिंह मेवाड़ को याद किया और भावुक हो गए। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि 77वें श्री एकलिंग दीवान के रूप में वे अपने पिता के संस्कारों और आदर्शों के आलोक में मेवाड़ की गौरवशाली परंपराओं के निर्वहन का संकल्प लेते हैं। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने जिस मूल्य-आधारित जीवन और समाज सेवा की परंपरा को आगे बढ़ाया, वही उनके लिए प्रेरणा का प्रमुख स्रोत है।
अपने पिता की स्मृतियों और आदर्शों को चिरस्थायी बनाने के उद्देश्य से डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने ‘महाराणा अरविंद सिंह मेवाड़ अलंकरण’ की घोषणा की और इसके साथ ही राष्ट्रीय स्तर के एक नए अलंकरण का भी शुभारंभ किया। यह अलंकरण उन व्यक्तित्वों को समर्पित होगा जिन्होंने अपने कार्यों और योगदान से समाज, संस्कृति, राष्ट्र निर्माण और मानवीय मूल्यों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। समारोह में देश-विदेश से सम्मानित होने आए महानुभावों का डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने पुष्पहार पहनाकर स्वागत किया। कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों और विशिष्ट जनों ने भी इस अवसर की गरिमा को बढ़ाया। कार्यक्रम के दौरान सबसे पहले विद्यार्थियों को सम्मान के लिए आमंत्रित किया गया। इस अवसर पर कुल 81 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों की उपलब्धियों को देखकर समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों ने अपने स्थान पर खड़े होकर तालियों के साथ उनका अभिनंदन किया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर का कर्नल जेम्स टॉड सम्मान अमेरिका की डॉ. मॉली एम्मा एटकिन को प्रदान किया गया। वे भारतीय लघुचित्र परंपरा, विशेषतः मेवाड़ एवं राजपूत दरबारी चित्रकला की अग्रणी विदुषी के रूप में जानी जाती हैं। भारतीय कला और इतिहास पर उनके शोध कार्यों ने मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। डॉ. मॉली एम्मा एटकिन का कार्य कर्नल जेम्स टॉड की उस ऐतिहासिक परंपरा का आधुनिक विस्तार माना जाता है, जिसके माध्यम से मेवाड़ की संस्कृति, इतिहास और कलात्मक विरासत को विश्व पटल पर प्रतिष्ठित किया गया। राष्ट्रीय स्तर का हल्दीघाटी सम्मान वरिष्ठ पत्रकार कमलेश किशोर सिंह को प्रदान किया गया। कमलेश किशोर सिंह भारतीय मीडिया जगत में तीन दशकों से सक्रिय हैं। डिजिटल पत्रकारिता में नवाचार, हिंदी पत्रकारिता को सशक्त दिशा प्रदान करने तथा नई पीढ़ी के पत्रकारों को मार्गदर्शन देने में उनका योगदान उल्लेखनीय रहा है। लोकप्रिय पॉडकास्ट ‘तीन ताल’ में ‘ताऊ’ के रूप में उनकी उपस्थिति व्यापक जनसमूह को समसामयिक विषयों पर गंभीर चिंतन के लिए प्रेरित करती है।
हकीम खां सूर सम्मान इस वर्ष भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर रिज़वान मलिक, वीआरसी को प्रदान किया गया। स्क्वाड्रन लीडर रिज़वान मलिक भारतीय वायुसेना के सेवारत अधिकारी हैं और वर्ष 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान प्रदर्शित असाधारण वीरता के लिए वीर चक्र से अलंकृत किए गए हैं। वे एक फाइटर पायलट के रूप में कमीशंड हैं और उन्नत लड़ाकू विमानों के संचालन में दक्ष हैं। मणिपुर राज्य के इम्फाल पूर्व जिले के केइखु गांव से आने वाले मलिक अपने राज्य और राष्ट्र के लिए गौरव का स्रोत बने हैं। इस वर्ष पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान हेतु श्री मरिमुथु योगनाथन को महाराणा उदय सिंह सम्मान से सम्मानित किया गया, जिन्हें देशभर में ‘ट्री मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाना जाता है। कोयंबटूर में तमिलनाडु राज्य परिवहन निगम (टीएनएसटीसी) में बस परिचालक के रूप में कार्यरत रहते हुए वे लगभग चार दशकों से वृक्षारोपण, पर्यावरण जागरूकता और जलवायु संरक्षण के कार्य में समर्पित हैं। अब तक वे पाँच लाख से अधिक वृक्ष लगा चुके हैं। निर्धारित दायित्व सीमा से ऊपर उठकर किए गए कार्य के लिए दिया जाने वाला इस वर्ष का पन्नाधाय सम्मान, वर्ष 2017 में 35,000 फीट की ऊँचाई पर एक आपातकालीन प्रसव को सफलतापूर्वक संपन्न कराने वाले जेट एयरवेज़ की फ्लाइट 9डब्ल्यू 569 के समर्पित क्रू सदस्यों को सामूहिक रूप से प्रदान किया गया।
जेट एयरवेज़ की इस उड़ान के दौरान सीमित संसाधनों, चिकित्सकीय सुविधाओं के अभाव और अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में क्रू ने अद्भुत संयम, साहस और मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया। क्रू सदस्यों में ईशा जायकर, तेजस चव्हाण, कैथरीन वार्ष्णेय, सुष्मिता डेविड और डेबोरा तावारेस ने मिलकर एक नवजीवन को सुरक्षित जन्म दिलाया। इसी बीच कॉकपिट में कैप्टन प्रणव छाबडिया और कैप्टन मार्टिन फेसानेक संकट के परिचालन संबंधी पहलुओं का प्रबंधन करते रहे। उस बच्चे का नाम ‘जेटसन’ रखा गया, जो अपने परिवार के साथ मंच पर उपस्थित हुआ। मेवाड़ की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रतिष्ठित करने वाले मेवाड़ के 76वें वंशधर के सम्मान में इस वर्ष के प्रथम “महाराणा अरविंद सिंह मेवाड़ अलंकरण” से द इंडियन होटल्स कंपनी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री पुनीत चटवाल को भारत के पर्यटन क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट नेतृत्व और योगदान के लिए सम्मानित किया गया। राज्य स्तरीय सम्मान में इस वर्ष महर्षि हारीत राशि सम्मान से वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे को सम्मानित किया गया। 19 वर्षीय वेदमूर्ति देवव्रत ने वाराणसी में 50 दिनों तक पूर्णतः स्मरण शक्ति के आधार पर शुक्ल यजुर्वेद (माध्यंदिन शाखा) के दुर्लभ दंडक्रम विकृतिपाठ का संपादन किया। लगभग 200 वर्षों में पूर्ण दंडक्रम पारायण करने वाले वे विश्व के दूसरे विद्वान माने जाते हैं।
समाज में शैक्षिक, चारित्रिक, नैतिक, सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान हेतु स्थायी मूल्य की सेवाओं के लिए इस वर्ष का महाराणा मेवाड़ सम्मान भारत की प्रथम ट्रांसजेंडर महिला सब-इंस्पेक्टर ऑफ पुलिस के. पृथिका याशिनी तथा वरिष्ठ पत्रकार भुवनेश जैन को प्रदान किया गया। जयपुर में पदस्थापित पत्रिका समूह के डिप्टी एडिटर भुवनेश जैन पिछले 41 वर्षों से प्रिंट मीडिया में सक्रिय हैं। राजनीतिक, सामाजिक विषयों, नगरीय विकास, अपराध, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर उनकी गहरी पकड़ रही है। दो दशकों से अधिक की संपादकीय नेतृत्व भूमिका, सार्क और जी-20 शिखर सम्मेलनों की कवरेज तथा प्रभावशाली स्तंभ लेखन के माध्यम से उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है। भारतीय संस्कृति, साहित्य एवं इतिहास के क्षेत्र में महाराणा कुम्भा सम्मान उदयपुर के प्रख्यात हिन्दी एवं राजस्थानी साहित्यकार तरुण कुमार दाधीच को प्रदान किया गया। ललित कला के क्षेत्र में महाराणा सज्जनसिंह सम्मान अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त सैंड आर्टिस्ट अजय रावत को प्रदान किया गया। रावत पुष्कर स्थित नेशनल सैंड आर्ट पार्क के संस्थापक हैं और 51 फुट ऊँची महाराणा प्रताप की प्रतिमा सहित अनेक भव्य रेत शिल्पों के माध्यम से उन्होंने इस कला को वैश्विक पहचान दिलाई है। संगीत के क्षेत्र में दिया जाने वाला डागर घराना सम्मान पद्म विभूषण से अलंकृत हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत के प्रख्यात बाँसुरी वादक पंडित हरिप्रसाद चौरसिया को प्रदान किया गया।
आदिवासी समाज के उत्थान हेतु राणा पूंजा सम्मान मांडना कलाकार डिंपल चण्डात को प्रदान किया गया, जो जनजातीय मांडना कला के संरक्षण एवं प्रलेखन के लिए समर्पित हैं। राज्य के खिलाड़ियों को दिए जाने वाले अरावली सम्मान से राम रतन जाट एवं अवनि लेखरा को अलंकृत किया गया। राम रतन जाट भारतीय नौसेना में चीफ पेटी ऑफिसर हैं और विश्वप्रसिद्ध अल्ट्रा-मैराथन धावक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने कैलिफ़ोर्निया में आयोजित 135 मील लंबी “वर्ल्ड्स टफेस्ट फुटरेस” पूर्ण की तथा कश्मीर से कन्याकुमारी तक 4,280.1 किमी की दौड़ 52 दिनों में पूरी कर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किया। अवनि लेखरा ने गंभीर स्पाइनल कॉर्ड चोट के बावजूद पैरा शूटिंग में अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई। टोक्यो पैरालंपिक 2020 में उन्होंने 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण तथा 50 मीटर राइफल 3 पोज़िशन में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा। वे एक ही पैरालंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं और वर्ष 2022 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित की गईं। इस वर्ष महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन के राज्य स्तरीय ‘महाराणा मेवाड़ विशेष सम्मान’ राजस्थान के बेस्ट पुलिस थाना सूरतगढ़ शहर और उदयपुर के राजेश वैष्णव को मेवाड़ की 500 वर्ष पुरानी पवित्र जल सांझी परंपरा के संरक्षण के लिए प्रदान किया गया। समारोह का समापन मोहलक्षिका कुमारी मेवाड़ के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। मंच संचालन हिन्दी में गोपाल सोनी तथा अंग्रेजी में रूपा चक्रवर्ती ने किया।
