ऑनलाइन ठगी का शिकार हुए रिटायर्ड बैंक अधिकारी, व्हाट्सएप वीडियो कॉल से 25 लाख की ठगी
Thursday, Jan 08, 2026-05:57 PM (IST)
श्रीगंगानगर। साइबर अपराधियों ने एक बार फिर अपनी शातिर चालों से एक रिटायर्ड अधिकारी को निशाना बनाते हुए लाखों रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। श्रीगंगानगर की सेतिया कॉलोनी निवासी और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) से सेवानिवृत्त कर्मचारी परमजीत सिंह तनेजा से ठगों ने खुद को मुंबई पुलिस और सीबीआई अधिकारी बताकर करीब 25 लाख रुपये ठग लिए। इस मामले में पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस जांच में जुट गई है।
पीड़ित परमजीत सिंह तनेजा ने बताया कि 23 दिसंबर 2025 को सुबह करीब 11:14 बजे उनके व्हाट्सएप नंबर पर एक वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले व्यक्ति ने अपना चेहरा छिपा रखा था और खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस थाने का अधिकारी बताया। ठग ने दावा किया कि परमजीत का केनरा बैंक अकाउंट मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवादी गतिविधियों में इस्तेमाल किया गया है और एक आतंकवादी के पास से उनका एटीएम कार्ड बरामद हुआ है।
परमजीत ने जब इन आरोपों को पूरी तरह झूठा बताया, तो ठगों ने उन्हें गंभीर धमकियां देनी शुरू कर दीं। कहा गया कि यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया तो पूरे परिवार को एनकाउंटर में मार दिया जाएगा। डर का माहौल बनाने के लिए ठगों ने उन्हें TRAI का फर्जी नोटिस, एटीएम कार्ड की फर्जी पीडीएफ, प्रवर्तन निदेशालय (ED) का फर्जी अरेस्ट वारंट और सीबीआई का मनी लॉन्ड्रिंग नोटिस भी व्हाट्सएप पर भेजा। इसके साथ ही कुछ तस्वीरें भी भेजी गईं, जिनमें एक व्यक्ति के पास कई एटीएम कार्ड दिखाए गए थे।
24 दिसंबर को ठगों ने परमजीत से उनकी एफडी, म्यूचुअल फंड और सेविंग अकाउंट की पूरी जानकारी मांगी। भय और मानसिक दबाव के चलते उन्होंने सारी जानकारी साझा कर दी। ठगों के कहने पर परमजीत ने अपनी पीएनबी की एफडी तुड़वाकर यस बैंक के बताए गए अकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने साफ धमकी दी कि अगर उन्होंने परिवार या बैंक अधिकारियों से संपर्क किया तो सिविल ड्रेस में लोग आकर गोली मार देंगे।
25 दिसंबर को ठगों ने फिर संपर्क किया और उन्हें 16-16 घंटे तक वीडियो कॉल पर बनाए रखा। मोबाइल की बैटरी 50 प्रतिशत से नीचे न जाने देने का भी दबाव बनाया गया। 26 दिसंबर को एक और अकाउंट नंबर भेजकर 11 लाख 52 हजार रुपये और ट्रांसफर करवाए गए। इस तरह कुल मिलाकर करीब 25 लाख रुपये की ठगी हो गई।
2 जनवरी 2026 को जब ठगों का नंबर बंद मिला, तब परमजीत को ठगी का अहसास हुआ। उन्होंने परिवार को पूरी घटना बताई और तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराई, बाद में साइबर क्राइम थाने में मामला दर्ज कराया गया। पीड़ित ने बताया कि यह रकम उनकी रिटायरमेंट की जीवनभर की बचत थी।
साइबर अपराध विशेषज्ञों ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उनका कहना है कि पुलिस, सीबीआई या कोई भी जांच एजेंसी कभी फोन या वीडियो कॉल पर पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती। अनजान कॉल, फर्जी दस्तावेज और धमकियों से सावधान रहना ही ऐसी ठगी से बचने का सबसे बड़ा उपाय है।
