दो साल से चल रहा था आरजीएचएस में महंगी जांच का खेल! फिर ऐसे हुआ खुलासा
Sunday, Feb 15, 2026-03:54 PM (IST)
सीकर। राजस्थान सरकार की स्वास्थ्य योजना (आरजीएचएस) में स्वास्थ्य अधिकारियों के खिलाफ अनियमितताओं के आरोपों के बाद शनिवार को सात चिकित्सकों को निलंबित किया गया। इस कार्रवाई से चिकित्सकों में हड़कम्प मच गया। यह कदम उठाए जाने के बाद अधिकांश चिकित्सक और दवा विक्रेता योजना के तहत दवा लिखने और वितरण से कतराते नजर आए।
निलंबन की प्रक्रिया के बाद दिनभर विभिन्न कयास लगाए गए। जांच में पता चला कि जिन पर्चियों का ऑडिट किया गया, उन सभी पर्चियों में सरकारी अस्पताल से ही उपचार लिया गया था, लेकिन संभवतः लैब स्तर पर पर्चियों में हेरफेर कर अनावश्यक महंगी जांचें जोड़ी गई थीं, जिससे अस्पतालों और लैब संचालकों के बीच आपसी लाभ का खेल चल रहा था।
आरजीएचएस योजना में पर्चियों की हेराफेरी का खेल
आरजीएचएस योजना में आमतौर पर सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले मरीजों के स्लिप में पहचान का कोई तरीका नहीं होता। इसका फायदा उठाकर कुछ चिकित्सक और लैब संचालक योजना में पर्ची कटवाने के बाद सक्रिय कार्ड धारकों की जगह अन्य मरीजों को शामिल करके महंगी जांच लिखवाते थे। यह खेल पिछले दो सालों से चल रहा था, और इस दौरान एक ही लैब से जांचों की संख्या में असामान्य वृद्धि देखी गई, जिसमें एमआरआई और सीटी स्कैन जैसी महंगी जांचें शामिल थीं।
दो साल से चल रहा था खेल
चिकित्सकों के अनुसार, यह मामला वर्ष 2023-24 का है, जब आरजीएचएस योजना में महंगी जांचों का खेल चल रहा था। उस समय जिला मुख्यालय पर केवल एक ही लैब योजना से सम्बद्ध थी, जिसके कारण अधिकांश जांचें उसी लैब में की गईं। आरोप है कि इस दौरान जांचों की संख्या और लागत सामान्य से 2-3 गुना ज्यादा रही। निलंबित चिकित्सकों का कहना है कि उन्होंने पर्ची पर केवल जरूरी जांचें ही लिखीं थीं, लेकिन मरीज ने कहाँ और कैसे जांच करवाई, यह चिकित्सकों के नियंत्रण में नहीं था।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
डॉ. केके अग्रवाल, अधीक्षक कल्याण अस्पताल ने कहा, "आरजीएचएस योजना में चिकित्सकों के निलंबन का मामला वर्ष 2023-24 और 24-25 के दौरान सरकारी अस्पताल से काटी गई पर्चियों की ऑडिट में सामने आया है। चिकित्सकों ने किसी मरीज को सरकारी अस्पताल के अलावा कहीं और जांच कराने के लिए नहीं कहा था, और यह मरीज पर निर्भर करता है कि वह जांच कहाँ करवाता है।"
यह पूरा मामला अब स्वास्थ्य विभाग की जाँच के दायरे में है, और आरोप है कि सिस्टम में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हो चुकी हैं, जिनके खिलाफ अब सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।
