संगठनात्मक फेरबदल के बाद सत्ता की ओर संकेत: क्या मंत्रिमंडल में भी वसुंधरा राजे का दबदबा बढ़ेगा?
Sunday, Jan 04, 2026-05:56 PM (IST)
जयपुर। राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर समीकरण बदलते नज़र आ रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के हालिया संगठनात्मक फेरबदल ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की भूमिका को सीमित माना जा रहा था।
मोर्चा अध्यक्षों और संगठनात्मक जिम्मेदारियों की नई सूची पर अगर बारीकी से नज़र डाली जाए, तो साफ होता है कि जिन नेताओं को आगे किया गया है, वे अधिकतर वसुंधरा राजे के राजनीतिक काल और उनके गुट से जुड़े रहे हैं। यह संकेत केवल संगठन तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे आने वाले राजस्थान मंत्रिमंडल फेरबदल से जोड़कर देखा जा रहा है।
संगठन से सत्ता तक का संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद पार्टी के अंदर हुई समीक्षा में यह बात उभरकर सामने आई थी कि अंदरूनी गुटबाजी और नेतृत्व संतुलन की कमी ने नुकसान पहुंचाया।
अब संगठनात्मक स्तर पर संतुलन साधकर यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि पार्टी एकजुट है और पुराने, अनुभवी नेतृत्व को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।
वसुंधरा राजे गुट की वापसी
युवा मोर्चा, महिला मोर्चा और संगठन के अहम पदों पर जिन नामों को जगह दी गई है, वे वसुंधरा राजे के भरोसेमंद माने जाते हैं। इससे यह धारणा और मजबूत हुई है कि पार्टी नेतृत्व आगामी राजनीतिक चुनौतियों के लिए अनुभव और सामाजिक संतुलन दोनों पर भरोसा कर रहा है।
मंत्रिमंडल फेरबदल की पृष्ठभूमि
सूत्रों के अनुसार, संगठनात्मक फेरबदल को आगामी मंत्रिमंडल में संभावित बदलावों का संकेत माना जा रहा है। यह माना जा रहा है कि जिन नेताओं को संगठन में तरजीह मिली है, वे सत्ता संरचना में भी मजबूत दावेदारी पेश कर सकते हैं।
2026 की रणनीति
पंचायत और निकाय चुनावों के साथ-साथ 2026 की राजनीति को देखते हुए बीजेपी फिलहाल किसी भी तरह की अंदरूनी कलह से बचना चाहती है। ऐसे में संगठनात्मक संतुलन के जरिए पार्टी यह स्पष्ट संदेश दे रही है कि वह सभी प्रभावशाली धड़ों को साथ लेकर आगे बढ़ेगी।
साफ है कि हालिया संगठनात्मक फेरबदल केवल प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संकेत है। यह संकेत आने वाले दिनों में मंत्रिमंडल फेरबदल और सत्ता संतुलन में किस रूप में सामने आता है—इस पर अब राजस्थान की राजनीति की निगाहें टिकी हैं।
