बीकानेर में प्रसूताओं की मौत पर बवाल, चिकित्सा मंत्री की बैठक के बाहर कांग्रेस-पुलिस में झड़प
Thursday, Jun 11, 2026-02:55 PM (IST)
बीकानेर। पीबीएम अस्पताल में प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और कथित चिकित्सा लापरवाही के मामले ने गुरुवार को बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक रूप ले लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर बीकानेर पहुंचे और एसपी मेडिकल कॉलेज में अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। वहीं दूसरी ओर अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर कांग्रेस और यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया, जिसके चलते पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प हो गई।
चिकित्सा मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा, पीबीएम अस्पताल के अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया सहित विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष मौजूद रहे। बैठक में प्रसूताओं की बिगड़ी स्वास्थ्य स्थिति, संक्रमण के संभावित कारणों और अस्पताल की व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। साथ ही जोधपुर मेडिकल कॉलेज की विशेष जांच टीम की रिपोर्ट पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
मंत्री के दौरे से पहले अस्पताल प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आया। अस्पताल परिसर में विशेष सफाई अभियान चलाया गया। दीवारों की रंगाई-पुताई की गई, गंदगी और पान-गुटखे के निशानों को हटाया गया तथा वार्डों को व्यवस्थित किया गया। विशेष रूप से उस पोस्ट कोविड वार्ड के आसपास साफ-सफाई कराई गई, जहां प्रभावित प्रसूताएं भर्ती हैं।
इधर अस्पताल की व्यवस्थाओं और प्रसूताओं की मौत के मामले को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने यूथ कांग्रेस के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रैली निकालकर पीबीएम अस्पताल पहुंचे और धरने पर बैठ गए। जैसे ही चिकित्सा मंत्री के मेडिकल कॉलेज पहुंचने की सूचना मिली, प्रदर्शनकारियों ने परिसर में प्रवेश करने का प्रयास किया।
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक के बाद हालात तनावपूर्ण हो गए। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए हल्का बल प्रयोग किया और उन्हें पीछे धकेला। इस दौरान यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष भंवर कूकना घायल हो गए और बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। महिला कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने मेडिकल कॉलेज परिसर में प्रवेश करने से रोका।
वहीं अस्पताल में भर्ती प्रसूताओं में श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ की रहने वाली प्रीति नायक की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। संक्रमण के चलते उनका 13 बार डायलिसिस किया जा चुका है। अस्पताल प्रशासन लगातार उनकी निगरानी कर रहा है, जबकि अन्य चार महिलाओं की हालत में सुधार बताया जा रहा है।
कांग्रेस नेताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तथा स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की मांग की है। साथ ही मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना के तहत दवाओं की खरीद में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी विरोध प्रदर्शन के केंद्र में रहा। यह मामला अब प्रदेश की राजनीति और स्वास्थ्य व्यवस्था दोनों के लिए बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
