UP में डॉक्टरों से हिंदी और देवनागरी में दवाओं के नाम लिखने की अपील, ब्रजेश पाठक बोले- ‘चले देश में देशज भाषा’

Friday, Sep 25, 2026-02:16 PM (IST)

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं में भारतीय भाषाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की अपील की है। उन्होंने राज्य के चिकित्सकों से कहा है कि मरीजों को दी जाने वाली पर्चियों पर दवाओं और मेडिकल जांचों के नाम हिंदी अथवा देवनागरी लिपि में लिखने का प्रयास किया जाए।

ब्रजेश पाठक ने इस पहल को “राष्ट्र नायकों की अभिलाषा, चले देश में देशज भाषा” संदेश से जोड़ते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में भारतीय भाषाओं के अधिक इस्तेमाल से मरीजों को उपचार संबंधी जानकारी समझने में आसानी हो सकती है।

मरीजों को दवाएं और जांच समझने में होगी आसानी

स्वास्थ्य मंत्री के मुताबिक, यदि दवाओं और जांचों के नाम मरीजों की सहज भाषा या देवनागरी में लिखे जाएं तो उन्हें यह समझने में सुविधा होगी कि कौन-सी दवा कब लेनी है और कौन-सी जांच करानी है।

उन्होंने कहा कि भाषा को सरल बनाने से डॉक्टर और मरीज के बीच संवाद बेहतर हो सकता है। खासकर ऐसे मरीज, जो अंग्रेजी में लिखे मेडिकल नामों को आसानी से नहीं समझ पाते, उनके लिए यह पहल उपयोगी हो सकती है।

हिंदी में लिखने वाले डॉक्टरों को सम्मानित करने की बात

ब्रजेश पाठक ने कहा कि वह व्यक्तिगत रूप से ऐसी दवाओं को प्राथमिकता देंगे, जिनके नाम हिंदी में लिखे हों। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं में हिंदी और भारतीय भाषाओं का अधिकाधिक इस्तेमाल करने वाले चिकित्सकों को सम्मानित करने की बात भी कही।

हालांकि, दवाओं के नाम लिखते समय उनकी सही पहचान और चिकित्सकीय स्पष्टता बनाए रखना भी महत्वपूर्ण होगा, ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी की स्थिति न बने।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर भाषा को लेकर संकल्प

उपमुख्यमंत्री ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि यह भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के संकल्प के लिए उपयुक्त अवसर है।

उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाओं का अधिक से अधिक इस्तेमाल देश की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में मदद करता है।

भोजपुरी और अवधी जैसी स्थानीय भाषाओं में संवाद पर जोर

ब्रजेश पाठक ने चिकित्सकों से मरीजों के साथ उनकी स्थानीय या मातृभाषा में संवाद करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग भोजपुरी, अवधी समेत विभिन्न क्षेत्रीय भाषाएं बोलते हैं।

उनके अनुसार, यदि डॉक्टर मरीज की सहज भाषा में उसकी समस्या सुनें और बीमारी तथा उपचार को समझाने का प्रयास करें तो मरीज अपनी परेशानी को अधिक स्पष्ट तरीके से बता सकता है।

मातृभाषा में संवाद से मरीज और डॉक्टर के बीच विश्वास बढ़ाने तथा उपचार संबंधी जानकारी को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिल सकती है।

भारतीय भाषाओं के वैश्विक प्रसार का भी किया जिक्र

स्वास्थ्य मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेशों में हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में संवाद करने का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से भारतीय भाषाओं और संस्कृति को वैश्विक स्तर पर पहचान मिलती है।

ब्रजेश पाठक ने चिकित्सकों से भी अपने कार्यक्षेत्र में हिंदी और भारतीय भाषाओं के प्रयोग को बढ़ावा देने तथा मरीजों के साथ अधिक सहज संवाद स्थापित करने का आह्वान किया।

क्या है इस पहल का उद्देश्य?

  • डॉक्टरों की पर्चियों में हिंदी/देवनागरी के इस्तेमाल को बढ़ावा देना

  • मरीजों को दवाओं और जांचों की जानकारी आसानी से समझाना

  • डॉक्टर-मरीज संवाद को सरल बनाना

  • स्थानीय और मातृभाषाओं में संवाद को प्रोत्साहित करना

  • स्वास्थ्य सेवाओं में भारतीय भाषाओं के प्रयोग को बढ़ावा देना


Content Editor

Sourabh Dubey

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