उदयपुर में फ्री-एजुकेशन के नाम पर धर्मांतरण का खेल! सांसद मन्नालाल रावत ने लिया बड़ा एक्शन

Sunday, Jul 19, 2026-02:43 PM (IST)

उदयपुर: राजस्थान के उदयपुर जिले से जुड़े सात बच्चों को गोवा में रेस्क्यू किए जाने का मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। रेलवे पुलिस की सूचना पर गोवा बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) ने इन बच्चों को सुरक्षित संरक्षण में लिया। बच्चों में दो लड़कियां और पांच लड़के शामिल हैं, जिनकी उम्र लगभग 7 से 12 वर्ष बताई जा रही है। इसके बाद उदयपुर बाल कल्याण समिति को सूचना दी गई और एक टीम गोवा पहुंचकर बच्चों को वापस उदयपुर लेकर आई।

 

इस मामले को लेकर भाजपा सांसद मन्नालाल रावत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर विस्तृत जांच की मांग की है। सांसद ने आशंका जताई है कि शिक्षा के नाम पर बच्चों को राजस्थान से बाहर ले जाने के पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि कथित ईसाई मिशनरियों और अन्य संगठनों द्वारा धर्मांतरण की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और जांच जारी है।

 

सांसद रावत के अनुसार बच्चों को तमिलनाडु के एक स्कूल में दाखिला दिलाने के नाम पर उदयपुर से बस के जरिए अहमदाबाद और वहां से ट्रेन के माध्यम से गोवा ले जाया जा रहा था। यात्रा के दौरान किसी व्यक्ति ने रेलवे पुलिस को इसकी सूचना दी, जिसके बाद गोवा बाल कल्याण समिति ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बच्चों को सुरक्षित अपने संरक्षण में ले लिया।

 

जानकारी के अनुसार सभी बच्चे उदयपुर जिले की झाड़ोल तहसील के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं। बताया जा रहा है कि बच्चों के परिवार आर्थिक रूप से कमजोर हैं और उन्हें बेहतर शिक्षा का भरोसा देकर बाहर ले जाया जा रहा था। सांसद का दावा है कि संबंधित संस्थान में उदयपुर के अन्य बच्चे भी पहले से मौजूद हो सकते हैं। इस पहलू की भी जांच की जा रही है।

 

फिलहाल उदयपुर बाल कल्याण समिति बच्चों की काउंसलिंग कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उन्हें किस उद्देश्य से बाहर ले जाया जा रहा था। सांसद मन्नालाल रावत ने मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) जैसी केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग की है। उन्होंने डिजिटल लेन-देन और अंतरराज्यीय नेटवर्क की भी जांच कराने की बात कही है।

 

प्रशासनिक स्तर पर मामले की जांच जारी है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों को बाहर ले जाने के पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या था और क्या किसी प्रकार की अवैध गतिविधि या मानव तस्करी से जुड़े नेटवर्क की भूमिका रही है।


Content Editor

Anil Jangid

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