तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले फिर अटके, राजस्थान में बढ़ा आक्रोश; आंदोलन की चेतावनी
Sunday, Jun 21, 2026-04:55 PM (IST)
जयपुर। राजस्थान में तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादलों को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। राज्य सरकार द्वारा 19 जून से 5 जुलाई तक सभी संवर्गों के लिए स्थानांतरण पर लगे प्रतिबंध को हटाने के बावजूद तृतीय श्रेणी शिक्षकों को इस राहत से बाहर रखा गया है। इस निर्णय के बाद शिक्षकों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है और आंदोलन की संभावना भी जताई जा रही है।
सरकारी आदेश के अनुसार प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय अनुभाग-1 द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि निर्धारित अवधि में सामान्य तबादलों पर लगी रोक हटाई जाएगी, लेकिन शिक्षा विभाग के तृतीय श्रेणी वेतन श्रेणी के अध्यापकों पर यह प्रतिबंध यथावत रहेगा। वहीं चिकित्सा विभाग सहित कुछ अन्य संवर्गों को विशेष परिस्थितियों में छूट दी गई है।
इस निर्णय को लेकर शिक्षक संगठनों ने सरकार पर “दोहरे रवैये” का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि वर्ष 2018 के बाद से तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले पूरी तरह बंद हैं, जिससे हजारों शिक्षक अपने गृह जिलों से दूर कार्य करने को मजबूर हैं। कई शिक्षक 15 से 20 वर्षों से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया है।
राजस्थान में लगभग 10 जिलों को “डार्क जोन” घोषित किया गया है, जिनमें बाड़मेर, जैसलमेर, जालौर, सिरोही, बीकानेर, बारां, झालावाड़, डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ शामिल हैं। इन जिलों में पदों की कमी के कारण स्थानांतरण प्रक्रिया लगभग ठप पड़ी हुई है।
शिक्षक संगठनों का कहना है कि तबादला नीति 1994 से विचाराधीन है, लेकिन आज तक कोई स्पष्ट और स्थायी नीति लागू नहीं हो सकी है। इसके चलते केवल प्रभावशाली और सिफारिश वाले लोग ही लाभ उठा पाते हैं, जबकि सामान्य शिक्षक वर्षों से परेशान हैं।
शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष मोहरसिंह सलावद ने सरकार के निर्णय की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि यह तृतीय श्रेणी शिक्षकों के साथ भेदभाव है। उन्होंने मांग की कि सरकार तुरंत स्थायी तबादला नीति लागू करे और सभी शिक्षकों को समान अवसर प्रदान करे।
शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया तो वे राज्यव्यापी आंदोलन की राह पकड़ सकते हैं।
