रिहायशी इलाकों में आतंक मचाने वाला बाघ बन गया ''प्रेमी'', सुल्ताना की बेटी के साथ कैफे के पीछे आया नजर

Wednesday, Apr 22, 2026-05:54 PM (IST)

रणथंभौर: रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान से इस समय एक सुखद और रोमांचक खबर सामने आ रही है, जो वन्यजीव प्रेमियों के लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। बाघ RBT-2407 और बाघिन RBT-2510 को अब एक जोड़े के रूप में देखा जा रहा है, और इनकी मेटिंग की संभावना पर विचार किया जा रहा है। इस जोड़ी की यह दृश्यता रणथंभौर के लिए बहुत सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।

रिलेशनशिप के संकेत: बाघ और बाघिन का संग
बाघ RBT-2407, जो कि रणथंभौर के प्रसिद्ध बाघ T-93 का बेटा है और लगभग 4 साल का है, अब बाघिन RBT-2510 के साथ घूमते हुए नजर आ रहा है। यह बाघिन प्रसिद्ध बाघिन सुल्ताना (T-107) की बेटी है और मात्र 3 साल की है। दोनों का एक-दूसरे के साथ मूवमेंट देखना यह संकेत दे रहा है कि इनके बीच मेटिंग की संभावना प्रबल है।

झूमर बावड़ी वन क्षेत्र में बाघ-बाघिन का मूवमेंट
इस जोड़े का मूवमेंट इन दिनों झूमर बावड़ी वन क्षेत्र में सक्रिय है। सोमवार, 20 अप्रैल को भी दोनों को फतेह कैफे के पीछे आराम करते हुए देखा गया। यह दृश्य पर्यटकों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक रोमांचक अनुभव साबित हुआ। यह स्थल पहले काफी हद तक बाघों के लिए आतंक का कारण था, लेकिन अब यह जोड़ा क्षेत्र में प्राकृतिक तरीके से अपना स्थान बना रहा है।

बाघ RBT-2407 का बदला हुआ व्यवहार
कुछ महीनों पहले बाघ RBT-2407 को अक्सर जंगल से बाहर आकर आबादी वाले क्षेत्रों में देखा गया था, जिससे लोगों में खौफ का माहौल था। इसके कारण वन विभाग को उसे ट्रैंकुलाइज कर रेडियो कॉलर लगाना पड़ा था, ताकि उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा सके। लेकिन अब यह बाघ पूरी तरह से अपने प्राकृतिक व्यवहार में लौटता हुआ दिखाई दे रहा है और रिहायशी क्षेत्रों से दूर अपनी साथी के साथ घूम रहा है।
यह बदलाव न केवल बाघ की आदतों में सुधार को दर्शाता है, बल्कि रणथंभौर के पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बनाए रखने की दिशा में एक सकारात्मक कदम भी है। अब यह जोड़ा वन्यजीव संरक्षण के नजरिए से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मेटिंग से नए वंश का जन्म होगा, जो इन जीवों की प्रजाति के अस्तित्व को बनाए रखने में मदद करेगा।

वन्यजीव प्रेमियों के लिए उत्साह का विषय
यह रोमांचक घटना न केवल वन्यजीव प्रेमियों के लिए, बल्कि पर्यटकों के लिए भी उत्साहजनक है, क्योंकि यह रणथंभौर के जीवों के प्राकृतिक व्यवहार को समझने का एक अच्छा अवसर है। इन बाघों का यह जोड़ा अब केवल रणथंभौर के वन्यजीवों का हिस्सा नहीं बल्कि इसके संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक कदम प्रतीत हो रहा है।
वन्यजीव प्रेमियों और संरक्षणकर्ताओं के लिए यह संकेत है कि अगर प्राकृतिक पर्यावरण और परिस्थितियों को सही तरीके से बनाए रखा जाए, तो वन्यजीव अपनी प्राकृतिक आदतों और जीवनशैली को फिर से अपना सकते हैं।


Content Editor

Anil Jangid

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