राजस्थानी भाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला लोककल्याणकारी-के.सी. मालू
Wednesday, May 13, 2026-08:19 PM (IST)
जयपुर। राजस्थानी भाषा को लेकर सुप्रीम कोर्ट द्वारा मंगलवार, 12 मई को दिया ऐतिहासिक फैसला गौरवमय और मंगलकारी है। राजस्थान के स्कूलों और कॉलेजों में राजस्थानी भाषा में पढ़ाई अनिवार्य करने के इस फैसले से राजस्थान ही नहीं, देश-विदेश में बसे करोड़ों राजस्थानियों में असीम खुशी का संचार हुआ है। मायड़ भाषा प्रेमियों को उत्साह और ऊर्जा से भर दिया है। राजस्थानी भाषा की मान्यता की दिशा में इसे ठोस उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है। राजस्थानी भाषा मान्यता समिति इस फैसले के लिए सर्वोच्च न्यायालय, खंडपीठ और दोनों माननीय न्यायमूर्ति का स्वागत, धन्यवाद तथा आभार प्रकट करती है।
राजस्थानी भाषा मान्यता समिति के अध्यक्ष के.सी. मालू के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले ने न सिर्फ राजस्थान का मान बढ़ाया है, बल्कि राजस्थानी भाषा को कानूनी समर्थन देकर संवैधानिक मान्यता का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। इस फैसले से मायड़ भाषा के प्रेमियों, हितैषियों और शुभचिंतकों को संविधान की आठवीं अनुसूची में राजस्थानी को मान्यता का संवैधानिक अधिकार भी मिल गया है।
मालू ने बताया कि इस फैसले से न सिर्फ राजस्थानी भाषा का प्रचार-प्रसार होगा, बल्कि राजस्थान की विरासत, कला-संस्कृति, संगीत और साहित्य की वैश्विक पटल पर स्वीकार्यता बढ़ेगी तथा मान-सम्मान मिलेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो अभिभावक अपने बच्चों को स्कूलों तथा कॉलेजों में राजस्थानी भाषा में पढ़ाने से कतराते थे, जो छात्र मायड़ भाषा पढ़ने में हिचकिचाते थे, वे अब सगर्व राजस्थानी में अध्ययन कर सकेंगे। राजस्थानी छात्र उच्च शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थानी विषय लेकर गैर-राजस्थानी छात्रों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन और रोजगारोन्मुखी शैक्षिक उपलब्धि हासिल कर पाएंगे। हमारे होनहारों के लिए अपना भाषाई कौशल दिखाने के साथ रोजगार के नए द्वार और उद्यम के व्यापक रास्ते खुलेंगे।
