भीलवाड़ा मांडलगढ़ विधायक पुत्र को DMFT में ट्रस्टी बनाया , सत्ता का यह कैसा लाभ?
Thursday, Aug 13, 2026-05:14 PM (IST)
भीलवाड़ा। जिले के माण्डलगढ़ सत्ता के गलियारों में पद और प्रभाव का लाभ किसे मिलता है, इसका एक और उदाहरण माण्डलगढ़ में सामने आया है। माण्डलगढ़ विधायक के बेटे मुकेश खंडेलवाल को भीलवाड़ा जिला डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) की गवर्निंग काउंसिल में ट्रस्टी मनोनीत किया गया है। नियुक्ति के बाद क्षेत्र की सियासत में सवाल उठने लगे हैं—क्या सत्ता का फायदा अब परिवार तक पहुंच रहा है?
राजस्थान सरकार के खान (ग्रुप-2) एवं पेट्रोलियम विभाग ने डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन ट्रस्ट रूल्स, 2025 के नियम 5(1) के तहत मुकेश खंडेलवाल का तीन वर्ष के लिए ट्रस्टी के रूप में मनोनयन किया है। आदेश विशिष्ट शासन सचिव नम्रता वष्णि की ओर से जारी किया गया है।

पिता विधायक… बेटे को सरकारी ट्रस्ट की जिम्मेदारी
राजनीतिक गलियारों में इस नियुक्ति को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की है कि पिता पहले से विधानसभा में क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और अब बेटे को भी DMFT जैसे महत्वपूर्ण ट्रस्ट में जगह मिल गई। DMFT कोई सामान्य संस्था नहीं है। खनन से प्राप्त राशि के माध्यम से खनन प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और दूसरी मूलभूत सुविधाओं पर करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं। ऐसे में ट्रस्टी का पद अपने आप में प्रभावशाली जिम्मेदारी माना जाता है।
विपक्ष के सवाल- योग्यता या राजनीतिक पहुंच?
मनोनयन के बाद अब राजनीतिक चर्चा यह है कि मुकेश खंडेलवाल को यह जिम्मेदारी किस आधार पर मिली—योग्यता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व या राजनीतिक प्रभाव? हालांकि सरकार की ओर से मनोनयन नियमों के तहत किया गया है, लेकिन पिता के विधायक रहते बेटे को महत्वपूर्ण पद मिलने से पारदर्शिता और राजनीतिक परिवारवाद को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
माण्डलगढ़ की जनता अब यह भी देखना चाहेगी कि DMFT में मिली इस जिम्मेदारी का लाभ परिवार को मिलता है या वास्तव में खनन प्रभावित गांवों को।
सवाल सीधा है- सत्ता जनता के लिए है या सत्ता का लाभ सत्ता से जुड़े परिवारों तक भी पहुंचेगा?
