सांगानेर क्षेत्र में स्थित 86 कॉलोनियों का बड़ा ऐलान, ''नियमन नहीं, तो वोट नहीं''

Sunday, Aug 30, 2026-06:00 PM (IST)

जयपुर। जयपुर नगर निकाय चुनावों से ठीक पहले जयपुर के सांगानेर क्षेत्र में स्थित 86 कॉलोनियों के नियमन हेतु संघर्ष कर रही जनकल्याण विकास समिति (आजाद नगर, गायत्री कॉलोनी, शिव कॉलोनी-डी, अम्बिका कॉलोनी-II) की महापंचायत की ओर से बड़ा ऐलान किया गया है। जिसके तहत इन सभी कॉलोनियों के निवासियों ने यह निर्णय लिया है कि यदि सरकार द्वारा उनकी कॉलोनियों के नियमन को लेकर कोई ठोक कदम नहीं उठाया गया तो वो इस चुनावों में अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करेंगे।

 

इसको लेकर जनकल्याण विकास समिति (आजाद नगर, गायत्री कॉलोनी, शिव कॉलोनी-डी, अम्बिका कॉलोनी-II) की संघर्ष समिति के महासचिव चंद्र सिंह राजावत ने कहा कि 'जैसा कि मुख्यमंत्री जी ने अभी कहा, हम पिछले कई वर्षों से इस न्यायिक मामले को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। इतने वर्षों से यहां रहने के बावजूद हम पंजीकृत सोसायटी से प्रभावित हैं। इसके बावजूद आज तक हमारे नियम-नेटु क्षेत्र के नियमन का कोई समाधान नहीं हुआ है।

 

उन्होंने कहा कि 8 मार्च को हमने पुरी में एक बड़ा प्रदर्शन किया था, जिसमें 86 कॉलोनियों से हजारों लोग शामिल हुए और उन्होंने सरकार तक यह संदेश पहुंचाया कि नियम-नेटु जाने का रास्ता खोला जाए। इसके बाद मजबूर होकर 86 कॉलोनियों के सभी लोगों ने 16 अगस्त को महापंचायत आयोजित की। इस महापंचायत में सैकड़ों लोग शामिल हुए, जिनमें महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और दिव्यांगजन भी मौजूद थे।

 

इस मामले को लेकर राजावत ने कहा कि महापंचायत में सभी लोगों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि हम पिछले कई वर्षों से इन सरकारों को वोट देते आए हैं। पिछले 35-40 वर्षों से हमने अपने वोट के माध्यम से इन लोगों को मुख्यमंत्री बनाने में योगदान दिया है। हमारे वोटों की बदौलत आज ये लोग मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे हैं।

 

उन्होंने कहा कि लेकिन यह हमारे लिए दुर्भाग्य की बात है कि आज भी हमारा नियमन नहीं हुआ है। न्यायपालिका की ओर से हमें अवैध घोषित कर दिया गया है। अगर सरकार के वकीलों ने न्यायालय में हमारा पक्ष मजबूती से रखा होता और पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए होते, तो आज हम नियमन की स्थिति में होते।

 

यहां लोग वर्षों से अपनी रोजी-रोटी चला रहे हैं। कई लोगों ने गांव में अपनी खेती और मकान तक बेच दिए और यहां आकर अपने घर बनाए हैं। अचानक यह कह दिया गया कि हम अवैध हैं। आखिर हम अवैध कैसे हो सकते हैं? हमारे वोटों से सरकारें बनी हैं।

 

इसी महापंचायत में सभी लोगों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि अब जो चुनाव आने वाले हैं, उनमें हमारा स्पष्ट नारा होगा— “नियमन नहीं, तो वोट नहीं।”

 

भविष्य में जब तक हमारा नियमन नहीं किया जाता, तब तक हम वोट नहीं देंगे। आप देखेंगे कि हर कॉलोनी में जगह-जगह बैनर लगाए जा रहे हैं और हर घर से यही आवाज उठ रही है— “नियमन नहीं, तो वोट नहीं।”

 

राजावत ने आगे कहा कि मैं यह संदेश जनता और सरकार तक पहुंचाना चाहता हूं। मुख्यमंत्री जी स्वयं विधानसभा के सदस्य हैं। अगर हमारा नियमन नहीं किया गया, तो आने वाले विधानसभा चुनाव हों या लोकसभा चुनाव, हम अपना विरोध दर्ज कराएंगे। इस बार हम इस व्यवस्था का हिस्सा नहीं बनेंगे और इस चुनाव का बहिष्कार करेंगे।'

 

इसी मुद्दे पर एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा कि 'हम अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं। लोगों ने पंजीकृत सोसायटियों से जमीन खरीदकर अपने घर बनाए हैं। इन कॉलोनियों में 80 से 100 प्रतिशत तक आबादी बस चुकी है और यहां लाखों लोग रह रहे हैं। इसके बावजूद इतने वर्षों के बाद भी इन कॉलोनियों के नियमन को लेकर कोई ठोस समाधान नहीं हुआ है। हमने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की है। हम पिछले कई वर्षों से इस मुद्दे को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। यह मामला लंबे समय से न्यायालय में भी चल रहा है और इस मुद्दे को लेकर हमने कई बार अपनी बात रखी है।

 

उन्होंने बताया कि 8 मार्च 2026 को इन कॉलोनियों के हजारों लोगों ने एक बड़ा पैदल मार्च निकाला था। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और सरकार को स्पष्ट संदेश दिया गया कि हमारी समस्या का समाधान किया जाए। यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से किया गया था, लेकिन हमारी चिंता यह है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं ले रही है।

 

उन्होंने कहा कि जैसा कि मुख्यमंत्री ने भी कहा, पहले कभी इस समस्या को गंभीरता से नहीं लिया गया। एक बार हमारी बातचीत भी हुई थी और सरकार की ओर से इस मामले को देखने की बात कही गई थी। लेकिन हमारा मानना है कि इसके लिए सबसे जरूरी कदम न्यायालय में मजबूत पैरवी करना था। सरकार के वकीलों की ओर से न्यायालय में मजबूती से पक्ष रखा जाना चाहिए था और पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए जाने चाहिए थे। यह इस मामले का बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा था, लेकिन हमें नहीं लगता कि इस दिशा में उतना प्रभावी काम हुआ।

 

स्थानीय निवासियों का कहना है कि हमारी सरकार से मांग है कि अगर यह जमीन अधिग्रहित भूमि है, तो इसे डी-एक्वायर किया जाए और इन कॉलोनियों के नियमन का रास्ता बनाया जाए। आखिर आम आदमी क्या करेगा? लोगों ने अपनी मेहनत की कमाई लगाकर यहां जमीन खरीदी, मकान बनाए और वर्षों से यहां रह रहे हैं। ऐसे में उनकी समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए।

 

उनका कहना है कि अगर इसके बावजूद हमारी मांग पूरी नहीं होती है, तो 86 कॉलोनियों के सभी प्रतिनिधियों और लोगों की मौजूदगी में हुई महापंचायत में हमने एक बड़ा फैसला लिया है। महापंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि जब तक हमारी कॉलोनियों का नियमन नहीं किया जाता, तब तक इस क्षेत्र की जनता चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं करेगी।

 

अगर चुनाव के बाद भी यही स्थिति बनी रहती है, तो हमें एक बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। इसके तहत मुख्यमंत्री आवास का घेराव हो या सत्याग्रह, टोंक रोड पर बड़ा प्रदर्शन हो या कोई अन्य आंदोलन—हमें अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए अगला कदम उठाना पड़ेगा।

 

हम चाहते हैं कि सरकार हमारी समस्या को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द नियमन का रास्ता निकाले। अगर ऐसा नहीं होता है, तो आने वाले समय में हमें अपना अगला कदम उठाना पड़ेगा।'


Content Editor

Anil Jangid

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