सरमथुरा इलाके में बाघों के शिकार के लिए सांभर की मौजूदगी से खुश हैं वन्यजीव विशेषज्ञ
Tuesday, Mar 24, 2026-05:19 PM (IST)
धौलपुर: धौलपुर जिले के सरमथुरा इलाके में चल रहे बाघों के आंकलन और सर्वेक्षण के दौरान वन्यजीव विशेषज्ञों के लिए एक सकारात्मक खबर आई है। इस सर्वे में बाघों के प्रमुख शिकार, सांभर, के झुंडों की उपस्थिति देखी गई है, जिससे बाघों के लिए उनके प्राकृतिक हैबिटॉट के अनुकूल होने की संभावना जताई जा रही है। इस खोज को लेकर वन्यजीव विशेषज्ञ उत्साहित हैं क्योंकि अब तक यह चिंता व्यक्त की जा रही थी कि इस इलाके में प्रे-बेस (शिकार) की कमी के कारण बाघों द्वारा मवेशियों को शिकार बनाने की घटनाएं बढ़ सकती हैं।
उत्तराखंड में किए गए शोध के अनुसार, बाघ को सबसे अधिक सांभर का शिकार करना पसंद है। बाघों का आहार उनकी ताकत और समझदारी को दर्शाता है। इस अध्ययन के तहत यह पाया गया कि बाघ जब सांभर का शिकार करता है तो वह कई दिनों तक शिकार की तलाश से मुक्त हो जाता है, क्योंकि सांभर की खुराक उसे लंबे समय तक भोजन की कमी से निजात दिलाती है। इसके विपरीत, जंगली सूअर, हिरण और अन्य छोटे वन्यजीवों का शिकार करने में बाघ को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और उसे इसके बावजूद संतोषजनक भोजन नहीं मिल पाता।
वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, जंगल में बाघ की ताकत और रणनीति का सबसे अच्छा उदाहरण सांभर का शिकार है। इस शिकार के बाद बाघ न केवल लंबे समय तक अपनी ऊर्जा बचा सकता है, बल्कि जंगल में अगला शिकार ढूंढने की परेशानी से भी बच जाता है। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट से यह भी साफ है कि सरमथुरा क्षेत्र में अब प्रे-बेस की कमी का मुद्दा हल हो सकता है, जो बाघों के शिकार व्यवहार को सकारात्मक दिशा में प्रभावित करेगा।
इस रिपोर्ट के साथ-साथ वन्यजीव संरक्षण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है, क्योंकि यह क्षेत्र बाघों के लिए उपयुक्त है और उनकी सुरक्षा और शिकार की प्रक्रिया को बेहतर बना सकता है।
