अब गावों में भी लगेगा टैक्स सिस्टम, हर परिवार से सालाना 1200 रुपये वसूली की तैयारी
Thursday, Jun 18, 2026-05:13 PM (IST)
अलवर। राजस्थान में अब ग्रामीण प्रशासन से जुड़ा एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है, जिसके तहत गांवों में रहने वाले हर परिवार से सालाना लगभग 1200 रुपये का स्थानीय टैक्स वसूलने की तैयारी की जा रही है। यह प्रस्ताव लागू होने पर ग्राम पंचायतों के वित्तीय ढांचे में बड़ा परिवर्तन देखने को मिल सकता है।
इस नई व्यवस्था का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को केवल सरकारी अनुदानों पर निर्भर रहने के बजाय आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। यह कदम केंद्र सरकार की 16वीं वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुरूप बताया जा रहा है, जिसमें कहा गया है कि पंचायतों को अपने स्तर पर राजस्व बढ़ाने के लिए स्थानीय टैक्स और यूजर चार्ज वसूलने चाहिए।
अधिकारियों के अनुसार, यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो गांवों में आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों पर कर लगाया जाएगा। इसके अलावा कई सार्वजनिक सेवाओं के लिए अलग-अलग शुल्क भी निर्धारित किए जा सकते हैं। इनमें मुख्य रूप से सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, पेयजल आपूर्ति और स्थानीय मेलों व हाट बाजारों से जुड़ी वसूली शामिल है।
अलवर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) सालुखे गौरव रविंद्र के अनुसार, फिलहाल राज्य सरकार से विस्तृत दिशा-निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है। जैसे ही गाइडलाइन जारी होगी, इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कदम ग्रामीण विकास के लिए जरूरी है ताकि पंचायतें अपने स्तर पर योजनाओं को बेहतर ढंग से लागू कर सकें।
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, जिन ग्राम पंचायतों ने स्थानीय स्तर पर राजस्व बढ़ाने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए, उन्हें केंद्र सरकार से मिलने वाली विकास निधि में कटौती का सामना भी करना पड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार Government of India के 15वें और 16वें वित्त आयोग के माध्यम से गांवों में बुनियादी ढांचे और विकास कार्यों के लिए भारी बजट जारी करती है।
हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर ग्रामीण स्तर पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है। एक ओर प्रशासन का मानना है कि इससे गांवों में बेहतर सड़कें, स्वच्छता, जल आपूर्ति और बिजली जैसी सुविधाएं मजबूत होंगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया तो यह ग्रामीण स्वशासन को मजबूत कर सकती है। लेकिन इसके लिए पारदर्शी वसूली व्यवस्था, स्पष्ट उपयोग और स्थानीय स्तर पर जवाबदेही बेहद जरूरी होगी।
फिलहाल, सभी की नजरें राज्य सरकार की विस्तृत गाइडलाइन पर टिकी हैं, जिसके बाद ही यह तय होगा कि अलवर सहित अन्य जिलों में यह टैक्स व्यवस्था कब और कैसे लागू की जाएगी।
