RTE लॉटरी के 110 दिन बाद भी 1.80 लाख बच्चों को प्रवेश नहीं, अभिभावक संघ ने शिक्षा विभाग पर लगाए गंभीर आरोप
Saturday, Jun 20, 2026-05:02 PM (IST)
जयपुर। राजस्थान में आरटीई (निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम) के तहत चयनित बच्चों के प्रवेश में देरी को लेकर संयुक्त अभिभावक संघ ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। संघ का कहना है कि आरटीई लॉटरी निकले 110 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक लगभग 1.80 लाख चयनित विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में नियमित प्रवेश नहीं मिल पाया है। इस देरी के कारण हजारों गरीब और जरूरतमंद परिवारों के बच्चों का भविष्य अनिश्चितता में फंसा हुआ है।
संघ के अनुसार, वर्तमान शैक्षणिक सत्र 1 अप्रैल 2026 से शुरू हो चुका है और पढ़ाई का एक बड़ा हिस्सा आगे बढ़ चुका है, इसके बावजूद चयनित बच्चों को स्कूलों में प्रवेश नहीं दिया गया है। लगभग सवा छह लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, जिनमें से करीब 2.40 लाख विद्यार्थियों का चयन 12 मार्च 2026 को लॉटरी प्रक्रिया के माध्यम से किया गया था।
संयुक्त अभिभावक संघ के प्रदेश प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि कई निजी विद्यालय आरटीई नियमों का पालन करने के बजाय तकनीकी और प्रशासनिक बहानों के आधार पर प्रवेश देने में देरी कर रहे हैं। वहीं शिक्षा विभाग की ओर से शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही है। संघ का कहना है कि विभाग की निष्क्रियता के कारण गरीब बच्चों के अधिकारों का हनन हो रहा है।
अभिभावक संघ ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार और शिक्षा विभाग का ध्यान चयनित विद्यार्थियों को समय पर प्रवेश दिलाने के बजाय निजी स्कूलों के हितों की सुरक्षा पर अधिक केंद्रित है। संघ के प्रतिनिधियों ने सवाल उठाया कि यदि यही स्थिति किसी प्रभावशाली वर्ग के बच्चों के साथ होती तो तत्काल विशेष अभियान चलाकर समाधान कर दिया जाता।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष ने मांग की है कि सरकार तुरंत विशेष अभियान चलाकर सभी चयनित बच्चों को स्कूलों में प्रवेश दिलाए और नियमों का उल्लंघन करने वाले निजी स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे। साथ ही अभिभावकों को अनावश्यक दस्तावेजी परेशानियों से राहत देने की भी मांग की गई है।
संयुक्त अभिभावक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं किया गया तो 1 जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा, जो सड़क से लेकर न्यायालय तक जारी रहेगा।
