दो साल में ₹36.58 करोड़ की साइबर ठगी, 232 मामलों ने उजागर की अंतरराष्ट्रीय गैंग की परतें

Sunday, Jun 07, 2026-06:15 PM (IST)

उदयपुर: मेवाड़-वागड़ क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधियों का आतंक दो साल से जारी है। उदयपुर रेंज में वर्ष 2025 और 2026 के दौरान 232 साइबर ठगी के मामले दर्ज हुए, जिनमें लोगों से कुल ₹36.58 करोड़ 7 हजार 501 की ठगी हुई। पुलिस जांच में सामने आया है कि इन वारदातों के तार कंबोडिया में बैठे संगठित साइबर सिंडिकेट से जुड़े हैं।

 

आरोपियों ने फर्जी सिम, किराये के बैंक खाते और विदेशी सर्वरों का इस्तेमाल कर भारत में करोड़ों रुपए की ठगी की। हालांकि कुल राशि में से अब तक केवल लगभग ₹3.60 करोड़ की रिकवरी हो पाई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, रकम कुछ ही मिनटों में कई खातों और क्रिप्टोकरेंसी के जरिए विदेशों में ट्रांसफर कर दी जाती है, जिससे ट्रैक करना बेहद कठिन हो जाता है।

 

जनवरी में दो मामले विशेष रूप से चौंकाने वाले रहे। सुखेर निवासी 68 वर्षीय भरत व्यास से डिजिटल अरेस्ट का भय दिखाकर ₹67.90 लाख और फतहपुरा निवासी 65 वर्षीय शशि जैन से ₹71 लाख ठग लिए गए। तकनीकी जांच में आरोपियों के आईपी एड्रेस कंबोडिया से जुड़े पाए गए, जिससे अंतरराष्ट्रीय साइबर गैंग की पुष्टि हुई।

 

जांच में यह भी सामने आया कि गरीब, ग्रामीण और छात्र नागरिकों को कमीशन के लालच में ‘म्यूल खाता’ खोलवाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। इन खातों में जमा राशि तुरंत अन्य खातों और क्रिप्टो प्लेटफॉर्म पर ट्रांसफर कर दी जाती है। इससे स्थानीय खातेधारक पुलिस की कार्रवाई में फंस जाते हैं, जबकि मास्टरमाइंड विदेश में सुरक्षित रहते हैं।

 

उदयपुर रेंज के आईजी गौरव श्रीवास्तव ने चेताया कि कोई भी सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल के जरिए गिरफ्तारी या पूछताछ नहीं करती। ऐसे कॉल आते ही उन्हें काटें और तत्काल 1930 हेल्पलाइन या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। उनका कहना है कि समय रहते शिकायत मिलने पर ठगी की राशि बचाने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।

 

इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय नागरिकों में साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता की जरूरत को उजागर किया है। पुलिस ने बार-बार नागरिकों से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश को नजरअंदाज करने की अपील की है।


Content Editor

Anil Jangid

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