राजलदेसर के पन्नासागर जोहड़ में हजारों पौधे बर्बाद, आवारा पशुओं ने उजाड़ी हरियाली

Tuesday, Aug 11, 2026-03:13 PM (IST)

चूरू: जिले के राजलदेसर क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए चलाया गया पौधरोपण अभियान अब प्रशासनिक लापरवाही के सवालों के घेरे में है। पन्नासागर जोहड़ की गोचर भूमि पर लगाए गए करीब दो हजार पौधों में से बड़ी संख्या में पौधे देखरेख और सुरक्षा के अभाव में नष्ट हो गए।

बताया जा रहा है कि नगर पालिका प्रशासन की ओर से 'हरियालो राजस्थान' और 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत पन्नासागर जोहड़ के आसपास पौधरोपण कराया गया था। इसके लिए नरेगा श्रमिकों की मदद ली गई और बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए।

सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से पौधों को नुकसान

पौधरोपण के बाद पौधों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम नहीं किए गए। मौके पर न तो पर्याप्त संख्या में ट्री-गार्ड लगाए गए और न ही पौधों को आवारा पशुओं से बचाने के लिए फेंसिंग करवाई गई।

पन्नासागर जोहड़ की गोचर भूमि में आवारा मवेशियों की आवाजाही रहती है। सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने के कारण पशुओं ने लगाए गए पौधों को नुकसान पहुंचाया। स्थानीय लोगों के मुताबिक, समय पर सुरक्षा उपाय किए जाते तो बड़ी संख्या में पौधों को बचाया जा सकता था।

अभियान के बाद देखरेख पर सवाल

स्थानीय निवासियों ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पौधरोपण के समय अभियान को लेकर काफी सक्रियता दिखाई गई, लेकिन इसके बाद पौधों की नियमित निगरानी और संरक्षण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

क्षेत्रवासियों का आरोप है कि पौधे लगाने के बाद उनकी जिम्मेदारी से जुड़े इंतजामों को नजरअंदाज कर दिया गया। इससे पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से शुरू किया गया अभियान प्रभावी परिणाम देने में असफल रहा।

सरकारी खर्च पर भी उठे सवाल

पौधरोपण के लिए सरकारी स्तर पर संसाधन और नरेगा श्रमिकों की सेवाएं ली गई थीं। ऐसे में पौधों के नष्ट होने से अभियान पर खर्च हुई सरकारी राशि के प्रभावी उपयोग को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। साथ ही, पौधों की सुरक्षा में लापरवाही के लिए जिम्मेदारी तय करने, आवश्यक कार्रवाई करने और पन्नासागर जोहड़ क्षेत्र में दोबारा पौधरोपण कराने की मांग की गई है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि नए पौधे लगाने के साथ उनकी सुरक्षा के लिए ट्री-गार्ड और फेंसिंग जैसी व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि अभियान का वास्तविक लाभ जमीन पर दिखाई दे सके।


Content Editor

Ishika Jain

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