राजस्थान के स्वच्छता मॉडल को राष्ट्रीय पहचान, मध्यप्रदेश सरकार ने के.के. गुप्ता को कार्यशालाओं में किया आमंत्रित

Sunday, Jul 12, 2026-04:15 PM (IST)

जयपुर/उदयपुर। राजस्थान के ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत राजस्थान सरकार के प्रदेश स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर के.के. गुप्ता को मध्यप्रदेश शासन ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन पर आयोजित संभाग स्तरीय क्षमतावर्धन प्रशिक्षण कार्यशालाओं में मुख्य अतिथि एवं मार्गदर्शक के रूप में आमंत्रित किया है।

यह आमंत्रण ऐसे समय में मिला है, जब सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर देशभर में स्वच्छता व्यवस्था को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

15 से 20 जुलाई तक उज्जैन, इंदौर और रीवा में होंगी कार्यशालाएं

मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी आमंत्रण के अनुसार 15 से 20 जुलाई 2026 के बीच उज्जैन, इंदौर और रीवा संभागों में प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यशालाओं में नगर निगमों और नगर परिषदों के महापौर, अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, नेता सदन तथा अन्य जनप्रतिनिधियों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के वैज्ञानिक और व्यवहारिक मॉडल की जानकारी दी जाएगी।

कार्यशालाओं का उद्देश्य 1 अप्रैल 2026 से लागू ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप नगरीय निकायों में प्रभावी कचरा प्रबंधन प्रणाली विकसित करना है।

राजस्थान मॉडल और डूंगरपुर की उपलब्धियों का मिलेगा लाभ

आमंत्रण पत्र में के.के. गुप्ता के स्वच्छता क्षेत्र में लंबे अनुभव, नवाचारों और राजस्थान में जनभागीदारी आधारित स्वच्छता अभियान को नई दिशा देने में उनके योगदान का विशेष उल्लेख किया गया है।

पत्र में कहा गया है कि उनके मार्गदर्शन में डूंगरपुर को स्वच्छता मॉडल के रूप में विकसित करने के प्रयासों ने कई नगरीय निकायों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, कचरा पृथक्करण और जनसहभागिता के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया है।

मध्यप्रदेश शासन चाहता है कि उनके अनुभवों का लाभ प्रदेश के जनप्रतिनिधियों को मिले, ताकि वे अपने-अपने शहरों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित कर सकें।

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद बढ़ी सक्रियता

हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों को ठोस अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था मजबूत करने, जिला प्रशासन की जवाबदेही तय करने और नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद विभिन्न राज्यों में जनप्रतिनिधियों और नगरीय निकायों के लिए प्रशिक्षण एवं क्षमता-वर्धन कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

मध्यप्रदेश सरकार की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

गांधीनगर के आदर्श गांवों में भी कर चुके हैं काम

के.के. गुप्ता ने राजस्थान के अलावा गुजरात के गांधीनगर संसदीय क्षेत्र में सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिए गए रूपाल, बिलेश्वरपुरा, रामनगर, मनकोल और मोडसर गांवों में भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, कचरा संग्रहण एवं निस्तारण, वर्षा जल संरक्षण, वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया।

उनके मार्गदर्शन में बिलेश्वरपुरा गांव ने सांसद आदर्श ग्राम योजना में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान और रूपाल गांव ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।

अमित शाह ने भी की थी सराहना

इन उपलब्धियों से प्रभावित होकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने के.के. गुप्ता के कार्यों की सार्वजनिक रूप से सराहना की थी। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी उनके प्रयासों का उल्लेख करते हुए संबंधित तस्वीरें साझा की थीं।

स्वच्छता और ग्राम विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए के.के. गुप्ता को गुजरात सरकार द्वारा राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में सम्मानित भी किया जा चुका है।

राजस्थान मॉडल को मिली राष्ट्रीय पहचान

मध्यप्रदेश शासन का यह आमंत्रण केवल के.के. गुप्ता के व्यक्तिगत योगदान का सम्मान नहीं, बल्कि राजस्थान में विकसित जनसहभागिता आधारित स्वच्छता मॉडल और वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर मिल रही बढ़ती स्वीकार्यता का भी प्रतीक माना जा रहा है। इससे राजस्थान के स्वच्छता मॉडल को अन्य राज्यों में भी अपनाने की दिशा में नई संभावनाएं खुल सकती हैं।


Content Editor

Sourabh Dubey

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