जल महल में जल समाधि की चेतावनी, पंचायतीराज कर्मचारियों का आंदोलन उग्र, जयपुर कूच की तैयारी
Monday, Jun 22, 2026-12:33 PM (IST)
जयपुर। राजस्थान में भजनलाल सरकार के सामने ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग के मंत्रालयिक कर्मचारियों के आंदोलन के चलते एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती खड़ी हो गई है। स्वाभिमान बचाओ आंदोलन के तहत पिछले करीब 20 दिनों से चल रही पेन-डाउन हड़ताल अब तेज होते हुए जयपुर कूच और बड़े स्तर पर प्रदर्शन की ओर बढ़ रही है।
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि उनकी लंबे समय से लंबित मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है, जिसके चलते आंदोलन को और व्यापक करने का फैसला किया गया है। इस हड़ताल के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमाण पत्र जारी करने, विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और अन्य प्रशासनिक कार्यों पर गंभीर असर पड़ा है।
आंदोलनकारी कर्मचारियों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि ग्रामीण सेवा शिविर-2026 जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का बहिष्कार जारी है। कर्मचारी भले ही कार्यालयों में उपस्थित हैं, लेकिन किसी भी प्रकार के फाइल कार्य में भाग नहीं ले रहे हैं। इसके अलावा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और विभागीय बैठकों का भी बहिष्कार किया जा रहा है।
संगठन ने 23 से 25 जून के बीच चरणबद्ध तरीके से जयपुर कूच का कार्यक्रम घोषित किया है, जिसमें जिलों और ब्लॉकों से कर्मचारी राजधानी पहुंचकर राज्य सरकार को मांग पत्र सौंपेंगे। कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में उत्तराखंड मॉडल की तर्ज पर कैडर पुनर्गठन, अंतर-जिला स्थानांतरण नीति, पदोन्नति के अवसर बढ़ाने के लिए नए पदों का सृजन और ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए अतिरिक्त भत्तों की स्वीकृति शामिल है।
इसके अलावा संगठन ने कनिष्ठ लिपिक पद के पुनर्गठन और उसे ‘पदेन सचिव’ या ‘कार्यक्रम अधिकारी’ के रूप में उन्नत करने की भी मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि वे वर्षों से केवल आश्वासनों पर काम कर रहे हैं और उनकी सेवा शर्तों में सुधार नहीं किया गया है।
यदि सरकार की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है, तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। संगठन ने 6 जुलाई को मुख्यमंत्री आवास के घेराव और 7 जुलाई को जयपुर के ऐतिहासिक जल महल के सामने ‘जल समाधि’ जैसे प्रतीकात्मक विरोध कार्यक्रम की चेतावनी दी है।
हालांकि, प्रशासन की ओर से अब तक स्थिति को नियंत्रित करने और वार्ता के प्रयास किए जाने की उम्मीद जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आंदोलन लंबा खिंचता है तो ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी सेवाओं पर व्यापक असर पड़ सकता है।
