राजस्थान में स्वास्थ्यकर्मियों की डिजिटल मैपिंग शुरू, बनेगी HPR-ID; जानिए क्या होंगे फायदे
Monday, Mar 09, 2026-06:01 PM (IST)
राजस्थान में अब चिकित्सा विभाग के कर्मचारियों की भी डिजिटल मैपिंग की जा रही है। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत राज्य के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और पैरामेडिकल कर्मियों का हेल्थ केयर प्रोफेशनल रजिस्ट्री (HPR) में पंजीकरण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया के बाद हर स्वास्थ्यकर्मी को एक यूनिक HPR-ID दी जाएगी।
यह व्यवस्था कुछ हद तक शाला दर्पण पोर्टल की तरह काम करेगी, जिसमें चिकित्सा कर्मियों की पूरी जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। इस आईडी में संबंधित स्वास्थ्यकर्मी की शैक्षणिक योग्यता, वर्तमान पदस्थापन, कार्यक्षेत्र और सेवा रिकॉर्ड जैसी अहम जानकारियां दर्ज होंगी।
इस डिजिटल सिस्टम के लागू होने के बाद यह भी आसानी से पता लगाया जा सकेगा कि राज्य में कौन-सा स्वास्थ्यकर्मी किस अस्पताल में कार्यरत है और उसकी सेवाओं का उपयोग किस तरह किया जा रहा है।
सभी जिलों को दिए गए निर्देश
इस संबंध में नेशनल हेल्थ मिशन के निदेशक ने राज्य के सभी 50 जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (CMHO) को निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों से कहा गया है कि HPR रजिस्ट्री में स्वास्थ्यकर्मियों का पंजीकरण जल्द से जल्द पूरा कराया जाए।
प्रदेश में 77 हजार से अधिक हेल्थ वर्कर
राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में कुल 77,941 स्वास्थ्यकर्मी कार्यरत हैं। इनमें से अब तक 49,362 का HPR रजिस्ट्री में पंजीकरण किया जा चुका है, जबकि 28,579 स्वास्थ्यकर्मियों का पंजीकरण अभी बाकी है। इस प्रक्रिया में डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट और अन्य पैरामेडिकल कर्मचारी शामिल हैं।
HPR-ID के फायदे
हर स्वास्थ्यकर्मी का डिजिटल रिकॉर्ड एक जगह उपलब्ध रहेगा
राज्य में मेडिकल स्टाफ की तैनाती और सेवाओं की निगरानी आसान होगी
ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़ी जानकारी पारदर्शी होगी
हेल्थ सिस्टम की प्लानिंग और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा
