RGHS में फर्जी बिलिंग पर सरकार का बड़ा एक्शन, अस्पतालों और फार्मेसियों के लिए नई गाइडलाइन जारी
Thursday, Jun 25, 2026-03:55 PM (IST)
सीकर। राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) में सामने आए फर्जी बिलिंग और वित्तीय अनियमितताओं के मामलों के बाद राज्य सरकार ने योजना के संचालन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। विभागीय ऑडिट में कई गंभीर खामियां उजागर होने के बाद सरकार ने अस्पतालों और फार्मेसियों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है, जिसके तहत नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विभागीय जांच में पाया गया कि कई मामलों में दवाओं की वास्तविक कीमत से अधिक एमआरपी दिखाकर क्लेम प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा एक ही दवा के लिए अलग-अलग क्लेम में कीमतों में अंतर पाया गया, जिससे कृत्रिम रूप से बिल बढ़ाने की आशंका जताई गई। सरकार का मानना है कि इस प्रकार की गड़बड़ियों से सरकारी खजाने पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है, इसलिए निगरानी और सत्यापन प्रक्रिया को और मजबूत किया गया है।
नई गाइडलाइन के तहत अस्पतालों को मरीज के भर्ती होने से लेकर डिस्चार्ज होने तक का पूरा रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। साथ ही मरीज के भर्ती होने के 12 घंटे के भीतर उसकी टीआईडी (ट्रीटमेंट आईडी) बनानी होगी। किसी भी प्रकार की जांच रिपोर्ट को सात दिनों के भीतर पोर्टल पर अपलोड करना भी आवश्यक कर दिया गया है। यदि इलाज के पैकेज की राशि या उससे संबंधित जानकारी गलत पाई जाती है, तो संबंधित क्लेम तत्काल निरस्त कर दिया जाएगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई पैनल में शामिल अस्पताल आरजीएचएस के पात्र मरीज का इलाज करने से इनकार करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे योजना के पैनल से हटाया जा सकता है। इससे मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है।
फार्मेसियों के लिए भी नियमों को काफी सख्त किया गया है। अब दवाओं के क्लेम की विस्तृत जांच, ऑडिट और बैच नंबर का सत्यापन किया जाएगा। यदि दवा की एमआरपी में किसी प्रकार की विसंगति पाई जाती है तो संबंधित क्लेम अस्वीकार कर दिया जाएगा। सभी फार्मेसियों को खरीद बिल, जीएसटी चालान और स्टॉक रजिस्टर सुरक्षित रखने होंगे तथा बिलिंग अनिवार्य छूट के साथ ही करनी होगी।
नई व्यवस्था के तहत नकली, बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए या बिना सत्यापन वाले दावों पर अतिरिक्त भुगतान की वसूली की जाएगी। गंभीर मामलों में संबंधित फार्मेसी को आरजीएचएस पैनल से बाहर भी किया जा सकता है।
आरजीएचएस की अतिरिक्त कार्यकारी अधिकारी निधि पटेल ने बताया कि योजना की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। उन्होंने कहा कि इन नए नियमों का उद्देश्य पात्र लाभार्थियों को समय पर और बिना किसी परेशानी के सुविधाएं उपलब्ध कराना है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में योजना में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़े के मामले सामने आए थे, जिसके बाद कुछ डॉक्टरों और लैब संचालकों के खिलाफ मुकदमे भी दर्ज किए गए थे। इन्हीं घटनाओं के मद्देनजर सरकार ने यह नई सख्ती लागू की है।
