ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार और कृषि उद्यमिता मिशन की मांग, राहुल कस्वां ने लोकसभा में उठाया मुद्दा
Thursday, Aug 13, 2026-05:59 PM (IST)
चूरू सांसद राहुल कस्वां ने ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास और कृषि आधारित उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक विशेष राष्ट्रीय मिशन शुरू करने की मांग लोकसभा में उठाई है। नियम-377 के तहत मुद्दा उठाते हुए उन्होंने 'राष्ट्रीय ग्रामीण युवा अवसर एवं कृषि उद्यमिता मिशन' शुरू करने की आवश्यकता बताई।
ग्रामीण युवाओं के लिए स्थानीय अवसर बढ़ाने पर जोर
सांसद कस्वां ने कहा कि भारत की बड़ी युवा आबादी ग्रामीण इलाकों में रहती है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है, जो उच्च शिक्षा या तकनीकी प्रशिक्षण हासिल करने के बावजूद अपने क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने के कारण दूसरे शहरों का रुख करते हैं।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योगों की सीमित उपलब्धता के अलावा आधुनिक कौशल प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और वित्तीय सहायता की कमी भी युवाओं के सामने चुनौती है। ऐसे में जरूरत है कि युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला बनाने के बजाय उन्हें रोजगार देने वाला और उद्यमी बनने के लिए तैयार किया जाए।
एग्री-टेक और कृषि आधारित कारोबार में संभावनाएं
कस्वां ने कृषि क्षेत्र में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल को ग्रामीण युवाओं के लिए नए अवसरों से जोड़ने की बात कही। उन्होंने एग्री-टेक, ड्रोन, डिजिटल कृषि, पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन जैसे क्षेत्रों में युवाओं को प्रोत्साहित करने पर जोर दिया।
उनके अनुसार इन क्षेत्रों में प्रशिक्षण और जरूरी सहायता उपलब्ध कराकर युवाओं को स्थानीय स्तर पर कारोबार शुरू करने के लिए तैयार किया जा सकता है।
हर जिले में कौशल और डिजिटल प्रशिक्षण केंद्र की मांग
सांसद ने सरकार से प्रत्येक जिले में आधुनिक कौशल विकास एवं डिजिटल प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की मांग की। इसके साथ ही उद्योगों के सहयोग से युवाओं के लिए सवेतन अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया।
उन्होंने कृषि एवं उससे जुड़े क्षेत्रों में स्टार्टअप शुरू करने वाले युवाओं को वित्तीय सहायता के साथ तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार उपलब्ध कराने की व्यवस्था किए जाने की भी मांग रखी।
स्थानीय उत्पादों पर आधारित क्लस्टर बनाने का सुझाव
राहुल कस्वां ने स्थानीय कृषि उत्पादों और उपलब्ध संसाधनों के आधार पर रोजगार एवं उद्यमिता क्लस्टर विकसित करने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि इससे युवाओं को अपने ही क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे।
इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन होने से किसानों को भी अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है।
पलायन रोकने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत करने पर जोर
सांसद कस्वां ने कहा कि ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर अवसर उपलब्ध कराने से रोजगार की तलाश में होने वाला पलायन कम किया जा सकता है। साथ ही कृषि क्षेत्र में तकनीकी नवाचार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा तथा किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और कौशल को स्थानीय अवसरों से जोड़ना विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
