राजस्थान में फिर गहराया बिजली संकट! कोटा थर्मल की 2 यूनिट बंद, कोयले का स्टॉक क्रिटिकल
Friday, Aug 28, 2026-03:11 PM (IST)
जयपुर। राजस्थान में एक बार फिर बिजली संकट गहराने की आशंका बढ़ गई है। प्रदेश के तापीय बिजलीघरों में कोयले की कमी सामने आने लगी है। राज्य के सात सरकारी थर्मल पावर प्लांटों में निर्धारित नॉर्मेटिव स्टॉक की तुलना में औसतन महज 23 प्रतिशत कोयला बचा है। इनमें से पांच बिजलीघर क्रिटिकल श्रेणी के करीब पहुंच गए हैं। कोयले की आवक और खपत के बीच बढ़ता अंतर बिजली उत्पादन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
जानकारी के अनुसार देश के 190 तापीय बिजलीघरों में से 45 बिजलीघरों में कोयले का स्टॉक गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। इन प्लांटों में निर्धारित आवश्यकता का 25 प्रतिशत या उससे भी कम कोयला उपलब्ध है। राजस्थान के सरकारी तापीय बिजलीघर भी इसी संकट से प्रभावित हो रहे हैं।
आवक से ज्यादा हो रही कोयले की खपत
राजस्थान के सात सरकारी थर्मल पावर प्लांटों में 26 अगस्त को करीब 74 हजार टन कोयला पहुंचा, जबकि इसी दिन करीब 93 हजार टन कोयले की खपत हुई। यानी एक दिन में जितना कोयला प्लांटों तक पहुंचा, उससे करीब 19 हजार टन ज्यादा इस्तेमाल हो गया।
इन सात प्लांटों की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता करीब 7,580 मेगावाट है। 85 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर के आधार पर इनकी दैनिक कोयला आवश्यकता लगभग 1.04 लाख टन बताई गई है। इन बिजलीघरों के लिए नॉर्मेटिव कोयला स्टॉक करीब 21.87 लाख टन निर्धारित है, जबकि वर्तमान में करीब 5.04 लाख टन कोयला ही उपलब्ध बताया जा रहा है।
कोटा थर्मल की दो यूनिट बंद
कोटा थर्मल पावर प्लांट में भी कोयले की स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। यहां नॉर्मेटिव स्टॉक के मुकाबले करीब 26 प्रतिशत कोयला उपलब्ध है। प्लांट की यूनिट नंबर 3 और 6 में फिलहाल बिजली उत्पादन बंद है।
अधिकारियों के अनुसार दोनों यूनिट रखरखाव के कारण बंद हैं। हालांकि प्लांट में उपलब्ध कोयले का स्टॉक भी क्रिटिकल सीमा के बेहद करीब है। कोटा थर्मल को नॉर्मेटिव स्टॉक के रूप में करीब 3.91 लाख टन कोयले की जरूरत होती है, जबकि उपलब्ध स्टॉक करीब 1.01 लाख टन बताया गया है।
इससे पहले यूनिट नंबर 5 को भी जुलाई में कई दिनों तक बंद रखा गया था। ऐसे में यदि कोयले की आपूर्ति में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में बिजली उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
कालीसिंध थर्मल में भी कम स्टॉक
1200 मेगावाट क्षमता वाले झालावाड़ के कालीसिंध थर्मल पावर स्टेशन में भी कोयले का स्टॉक कम हो गया है। यहां नॉर्मेटिव स्टॉक करीब 3.36 लाख टन है, जबकि उपलब्ध कोयला लगभग 69 हजार टन बताया गया है। यानी स्टॉक घटकर करीब 21 प्रतिशत रह गया है।
26 अगस्त को कालीसिंध थर्मल में करीब 12 हजार टन कोयला पहुंचा, जबकि इसी दिन लगभग 15 हजार टन की खपत हुई। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल करीब एक सप्ताह का कोयला उपलब्ध है। फीडर में खराबी के कारण एक यूनिट को कुछ समय के लिए बंद भी करना पड़ा था।
छबड़ा प्लांट में भी छह दिन का कोयला
छबड़ा थर्मल पावर प्लांट में भी कोयले की उपलब्धता को लेकर चिंता जताई गई है। मुख्य इंजीनियर के अनुसार प्लांट में करीब छह दिन का कोयला बचा है। मांग बढ़ी है, लेकिन कोयले की आपूर्ति जरूरत के मुकाबले कम हो रही है।
छबड़ा सुपर क्रिटिकल प्लांट के अधिकारियों ने भी जरूरत से कम कोयला मिलने और अतिरिक्त रैक उपलब्ध नहीं होने की बात कही है।
बारिश से आपूर्ति पर असर
कोटा थर्मल प्लांट के अधिकारियों के अनुसार बारिश के कारण कोयले की आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि उनका कहना है कि फिलहाल उपलब्ध कोयला पर्याप्त है। इसके बावजूद कोयले की आवक और खपत के बीच अंतर लगातार बना रहा तो प्रदेश में बिजली उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है।
राजस्थान में बिजली की मांग बढ़ने और तापीय बिजलीघरों में कोयले का स्टॉक कम होने के कारण आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। यदि कोयले की आपूर्ति जल्द सामान्य नहीं हुई तो बिजली उत्पादन प्रभावित होने और राज्य में बिजली संकट गहराने की आशंका बढ़ सकती है।
