दिल्ली हादसे के बाद भरतपुर में होटलों की सुरक्षा की जांच: आग से बचाव और फायर सेफ्टी इंतजामों का रियलिटी चेक

Thursday, Jun 04, 2026-04:59 PM (IST)

भरतपुर: दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल में आग लगने से 21 लोगों की मौत के बाद भरतपुर में भी होटलों और गेस्ट हाउसों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इस संदर्भ में ईटीवी भारत ने शहर के होटलों, गेस्ट हाउसों और प्रशासन की तैयारियों का रियलिटी चेक किया। निरीक्षण में फायर सेफ्टी, गैस व्यवस्था और आपदा से निपटने की क्षमता की जांच की गई।

 

केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के पास स्थित आयोरा गेस्ट हाउस का निरीक्षण किया गया। गेस्ट हाउस संचालक देवेंद्र ने बताया कि पिछले तीन-चार वर्षों से यहां एलपीजी सिलेंडरों की बजाय पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) का उपयोग किया जा रहा है। किचन में सीधे पाइपलाइन से गैस सप्लाई होने के कारण सिलेंडर रिसाव और विस्फोट जैसी घटनाओं का जोखिम काफी हद तक कम हो गया है। निरीक्षण में पाया गया कि गेस्ट हाउस में पर्याप्त वेंटिलेशन और फायर एक्सटिंग्विशर लगाए गए हैं।

 

इसी तरह सनबर्ड होटल में भी PNG कनेक्शन उपलब्ध है। आपात स्थिति के लिए एलपीजी सिलेंडरों का गैस बैंक खुले क्षेत्र में बनाया गया है, जिससे रसोई तक पाइपलाइन के माध्यम से गैस सप्लाई होती है। होटल में फायर सेफ्टी उपकरण, अग्निशमन सिलेंडर और वेंटिलेशन की व्यवस्था भी मौजूद है। निरीक्षण में यह स्पष्ट हुआ कि केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र और प्रमुख पर्यटन इलाकों के बड़े होटल अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में हैं, जबकि शहर के भीतरी क्षेत्रों के छोटे होटल और गेस्ट हाउसों में सुरक्षा मानकों की नियमित निगरानी आवश्यक है।

 

नगर निगम आयुक्त श्रवण विश्नोई ने बताया कि शहर के होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को फायर एनओसी मिलने से पहले सभी सुरक्षा मानकों की जांच की जाती है। इसमें पानी के टैंक, फायर एक्सटिंग्विशर और फायर ब्रिगेड की पहुंच जैसी व्यवस्थाओं की पुष्टि की जाती है। निगम के पास तीन शिफ्टों में काम करने वाली फायर टीम और चार बड़ी फायर ब्रिगेड गाड़ियां हैं। आवश्यक होने पर आसपास की नगर पालिकाओं की फायर सेवाओं का भी सहयोग लिया जा सकता है।

 

आयुक्त ने स्पष्ट किया कि बिना फायर एनओसी के कोई भी होटल या व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित नहीं किया जा सकता। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सीज करने का प्रावधान भी मौजूद है। निरीक्षण और नियमों की जानकारी के बाद अब अधिकांश संचालक फायर एनओसी के लिए आवेदन कर रहे हैं। इस पहल से भरतपुर में आग से सुरक्षा और आपात स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।


Content Editor

Anil Jangid

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