Panchna Dam विवाद में सचिन पायलट की एंट्री, 360 गांवों के लोग पानी छोड़ने को लेकर अड़े

Friday, Jun 19, 2026-09:17 AM (IST)

करौली। राजस्थान में इस समय पांचना बांध को लेकर मुद्दा गरमाया हुआ है। यहां पर 360 गांवों के लोग इस बांध से नहरों में पानी छोड़ने को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। इसी बात को लेकर करौली जिले के हिण्डौन सिटी के महवा मार्ग स्थित देवलेन मोड़ पर गंभीर नदी बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले विशाल महापंचायत का आयोजन भी किया गया। इस महापंचायत में गंभीर नदी क्षेत्र के करीब 360 गांवों से हजारों लोग पहुंचे और पांचना बांध से गंभीर नदी में पानी छोड़ने की मांग को लेकर एकजुट हुए।

 

सभा में विभिन्न समाजों के नेताओं ने संबोधित करते हुए कहा कि गंभीर नदी क्षेत्र के गांव लंबे समय से सिंचाई और पेयजल संकट का सामना कर रहे हैं। वक्ताओं ने पांचना बांध का पानी गंभीर नदी में छोड़े जाने के साथ-साथ चंबल नदी का पानी पांचना बांध तक पहुंचाने की भी मांग उठाई। महापंचायत को देखते हुए पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारी भी पूरी तरह अलर्ट रहे और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी गई।

 

आपको बता दें कि यह मामला अब सिर्फ पांचना बांध के आसपास के गांवों का ही नहीं रह गया, बल्कि इसमें अब जातिगत और राजनीतिक समीकरण भी बनने लगे हैं। इसी बांध से पानी छोड़ने को लेकर पहले कृषिमंत्री किरोड़ी लाल मीणा राज्य सरकार को पत्र लिख चुके हैं, तो नरेश मीणा भी यह मांग उठा चुके हैं। वहीं, इस बांध के पानी विवाद को लेकर गृह राज्य मंत्री एवं जिला प्रभारी जवाहर सिंह बेदम कह चुके हैं सरकार इस मुद्दे का समाधान जल्द ही संवाद के जरिए निकालेगी। पांचना बांध से जुड़े सभी पक्ष किसान हैं और सरकार प्रत्येक पक्ष की भावनाओं एवं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए न्यायोचित निर्णय लेगी। उन्होंने मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों के नाम पर राजनीति करना ठीक नहीं।

 

वहीं, अब इस मामले में प्रदेश के पूर्व उपमुख्यमंत्री और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट की भी एंट्री हो चुकी है और उन्होंने इस विवाद को लेकर कहा कि पिछले कई दिनों से ग्रामीण आंदोलन कर रहे हैं और सरकार की जिम्मेदारी है कि सभी पक्षों की बात सुनकर न्यायपूर्ण निर्णय करे। उन्होंने कहा कि पानी सभी की जरूरत है और इस मुद्दे का समाधान नियमों व कानून के अनुसार होना चाहिए। पायलट ने कहा कि देश की न्यायपालिका पर सभी को भरोसा है, इसलिए हाईकोर्ट के निर्णय का सम्मान और उसकी पालना होनी चाहिए। सरकार को मौके पर टीम भेजकर सभी पक्षों से बातचीत करनी चाहिए, ताकि किसी के साथ अन्याय न हो।

 

आपको बता दें कि पांचना बांध का निर्माण वर्ष 1977 से 2004 के बीच करौली जिले में किया गया था। गांव के कमांड क्षेत्र के अंतर्गत सवाई माधोपुर और नवगठित गंगापुर सिटी जिले के कुल 35 गांव शामिल हैं। इन गांवों के किसानों का आरोप है कि वर्ष 2006 के बाद उन्हें पानी नहीं मिला।

 

वहीं दूसरी तरफ बांध के आस-पास के करौली जिले के 39 गांवों के किसानों का कहना है कि बांध निर्माण के समय इन ग्रामीणों की पुश्तैनी खेती की जमीनें और मकान पानी में डूब गए थे। उनका कहा था कि जमीनों का उचित मुआवजा, स्थानीय युवाओं को रोजगार और सिंचाई के लिए स्वीकृत गुड़ला-पांचना लिफ्ट परियोजना का पूरा पानी उन्हें नहीं मिल जाता, तब तक वे बांध के फाटकों को छूने भी नहीं देंगे। ऐसे में तनाव का आलम यह है कि पिछले 20 सालों में इस बांध से नहरों के जरिए खेतों के लिए नियमित पानी कभी नहीं छोड़ा गया।


Content Editor

Anil Jangid

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