पांचना बांध विवाद: करौली और सवाई माधोपुर में इंटरनेट बंद, प्रशासन अलर्ट मोड पर

Thursday, Jul 09, 2026-03:05 PM (IST)

करौली। पांचना बांध से पानी छोड़े जाने को लेकर करौली और सवाई माधोपुर जिलों में उत्पन्न विवाद के बाद प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। सोशल मीडिया पर भड़काऊ और आपत्तिजनक पोस्ट वायरल होने के बाद करौली जिले में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं। इसके साथ ही सवाई माधोपुर जिले के गंगापुर सिटी, वजीरपुर और बामनवास क्षेत्रों में भी इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई है। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय अफवाहों पर रोक लगाने और शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

 

पुलिस ने सोशल मीडिया पर भड़काऊ सामग्री साझा करने वाले कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए हैं। करौली सदर थाने में भी सामाजिक वैमनस्य फैलाने और शांति भंग करने के आरोप में कई व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा न करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।

 

इस बीच राहत की खबर यह रही कि गंगापुर सिटी-हिंडौन, करौली-गंगापुर सिटी, करौली-धौलपुर, करौली-हिंडौन और करौली-मंडरायल मार्गों पर गुरुवार सुबह से यातायात सामान्य हो गया। वजीरपुर क्षेत्र के कुसांय गांव में नहरों में पर्याप्त पानी नहीं मिलने से नाराज किसानों ने पिछले तीन दिनों से हिंडौन-गंगापुर मुख्य मार्ग जाम कर रखा था।

 

बुधवार देर रात कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा धरना स्थल पहुंचे और किसानों से बातचीत की। उन्होंने आश्वासन दिया कि नहरों में आई तकनीकी खराबी को दूर कर अगले 10 दिनों के भीतर पर्याप्त पानी छोड़ा जाएगा। मंत्री के आश्वासन के बाद किसानों ने अपना आंदोलन समाप्त करते हुए जाम हटा लिया, जिससे मुख्य मार्ग पर यातायात फिर से सुचारु हो गया।

 

इधर, गंगापुर सिटी के मिनी सचिवालय में जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत और कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ किसान प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। बैठक के दौरान जल वितरण व्यवस्था, कानून-व्यवस्था, नहरों की तकनीकी स्थिति और किसानों की मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई।

 

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पांचना बांध के गेटों और संबंधित संरचनाओं की मरम्मत अगले सात दिनों में पूरी की जाएगी। इसके बाद 17 और 18 जुलाई को किसान प्रतिनिधियों की मौजूदगी में गेटों का दोबारा परीक्षण किया जाएगा तथा कमांड क्षेत्र की नहरों में पानी छोड़कर पूरी व्यवस्था की जांच की जाएगी। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि किसानों के हितों का ध्यान रखते हुए जल वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारु बनाया जाएगा।


Content Editor

Anil Jangid

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