बारां में नरेश मीणा का किसानों के साथ अनिश्चितकालीन धरना, खाद की कालाबाजारी और कमी को लेकर प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
Wednesday, Jun 17, 2026-03:27 PM (IST)
बारां: राजस्थान के बारां जिले में खाद की किल्लत और कथित कालाबाजारी को लेकर किसानों का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी मुद्दे पर युवा नेता नरेश मीणा ने किसानों के साथ अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। इससे पहले भी वे छबड़ा क्षेत्र में एसडीएम कार्यालय के सामने प्रदर्शन कर चुके हैं।
बुधवार को नरेश मीणा ने बालापुरा गांव से छबड़ा तक पैदल यात्रा की, जिसमें बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। यात्रा के बाद सभी किसान छबड़ा स्थित एसडीएम कार्यालय के बाहर एकत्रित हुए और अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। धरने में सैकड़ों किसानों की भागीदारी देखी गई, जहां उन्होंने खाद की कमी और वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए।
प्रदर्शन के दौरान नरेश मीणा ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को समय पर खाद नहीं मिल रहा, और जो खाद उपलब्ध है वह भी महंगे दामों पर बेचा जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बाजार में खाद की कालाबाजारी हो रही है और कई किसानों को जबरन अटैचमेंट लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि खाद की अवैध रूप से अन्य राज्यों, विशेषकर मध्यप्रदेश, में तस्करी की जा रही है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी किसानों ने छबड़ा में टोकन वितरण में अनियमितताओं को लेकर सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया था। बीते शुक्रवार को हुए प्रदर्शन के बाद किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल ने एसडीएम सपना कुमारी से मुलाकात कर खाद की पर्याप्त उपलब्धता, कालाबाजारी पर रोक और दोषी व्यापारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की थी।
एसडीएम ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए तीन स्थानों पर चेक पोस्ट स्थापित किए गए हैं, जहां कृषि विभाग और पुलिस के अधिकारी तैनात हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि हाल ही में एक फर्म का लाइसेंस निरस्त किया गया है। साथ ही सभी डीलर्स को रेट लिस्ट प्रदर्शित करने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन के अनुसार वर्तमान में जिले में लगभग 8500 डीएपी और 6500 एनपीके खाद के कट्टे उपलब्ध हैं, जो पर्याप्त हैं। हालांकि, किसानों का कहना है कि जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है और उन्हें वास्तविक समय पर खाद नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी खेती प्रभावित हो रही है।
