राजस्थान में राष्ट्रीय पक्षी मोरों का सामूहिक मर्डर, जहर देकर 25 मोरों की हत्या
Thursday, May 21, 2026-03:05 PM (IST)
नागौर: राजस्थान के मकराना और उदयपुर जिलों से राष्ट्रीय पक्षी मोरों की सामूहिक हत्या की सनसनीखेज खबरें सामने आई हैं। नागौर जिले के मकराना उपखंड के गेहड़ा कलां गांव में बुधवार की सुबह 25 मोरों के शव पाए गए। शवों के पास मोरों के कटे और नोचे हुए पंख बोरियों में भरे मिले, जो इस घटना के पीछे संगठित शिकारी गैंग के होने का संकेत हैं।
स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि शिकारी मोरों को आकर्षित करने के लिए बाजरे और अन्य दानों में जहर मिलाकर रखते हैं। जहर खाने के कुछ ही मिनटों में मोर बेदम होकर गिर जाते हैं, जिसके बाद शिकारी उनके कीमती पंख और मांस की अवैध तस्करी करते हैं। तालाब और जलस्रोत के पास यह क्रूर कृत्य किया गया।
घटना की गंभीरता को देखते हुए गेहड़ा कलां ग्राम पंचायत ने उपखंड अधिकारी मकराना और क्षेत्रीय वन अधिकारियों को जानकारी दी और अज्ञात शिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कराया। ग्रामीणों ने आरोपियों की तुरंत गिरफ्तारी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया।
इसी बीच उदयपुर के वल्लभनगर उपखंड क्षेत्र से भी मोर के शिकार की घटना सामने आई। करणपुर गांव में अज्ञात शिकारियों ने टोपीदार बंदूक से एक मोर को निशाना बनाया। ग्रामीणों की सजगता के कारण शिकारी मौके से भागने में सफल रहे, लेकिन वन विभाग अब उनकी तलाश में जुट गया है।
स्थानीय ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यह शिकारी गैंग सिर्फ मोरों तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिमी और दक्षिणी राजस्थान में खरगोश, चिंकारा और नीलगाय जैसी प्रजातियों पर भी निशाना साधता है।
भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I के तहत मोर को सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा प्राप्त है और शिकार करने पर सात साल तक की जेल का प्रावधान है। इसके बावजूद यह घटनाएं वन विभाग की गश्त और निगरानी पर गंभीर सवाल उठाती हैं।
वन्यजीव प्रेमियों और ग्रामीणों का कहना है कि अगर समय रहते शिकारी गैंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो राजस्थान के गांवों में मोर केवल तस्वीरों में ही देखने को मिलेंगे। यह घटना वन संरक्षण और जागरूकता की आवश्यकता पर भी गंभीर रूप से ध्यान खींचती है।
